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जमाई और गुरुकुल इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में पुलिस का पैदल मार्च

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फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खोरी गांव के बाद अब जमाई कॉलोनी और गुरुकुल इंद्रप्रस्थ कॉलोनी को प्रशासन तोड़फोड़ की कार्रवाई करने जा रहा है। तोड़फोड़ से पहले शनिवार को पुलिस ने दोनों कॉलोनियों में पैदल मार्च निकाला। प्रशासन द्वारा ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिए गए हैं। हालांकि लोगों का कहना है कि जीवन भर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदा है। उसे खाली नहीं करेंगे।
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खोरी में तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में बने प्रकार के निर्माणों को ढहाए जाने के आदेश दिए थे। इसमें फार्म हाउस, होटल, शिक्षण संस्थान, सोसाइटियां व कॉलोनियां शामिल है। फार्म हाउसों पर खानापूर्ति की तोड़फोड़ कार्रवाई करने के बाद अब नगर निगम ने सैनिक कॉलोनी चौक स्थित अरावली में बसी जमाई कॉलोनी में तोड़फोड़ की तैयारी की है।
शनिवार को भारी पुलिस बल कॉलोनी में पहुंचा। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई, लोग सहम गए। पुलिस ने लोगों को घरों को खाली करने के लिए समझाया। कॉलोनी में मार्च निकाल कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इससे पूर्व नगर निगम की ओर से कॉलोनी में जगह-जगह नोटिस चस्पा कर दिए गए। नोटिस के माध्यम से लोगों से अपील की है कि अपने मकानों व दुकानों को खाली कर लें नहीं तो नगर निगम जब कार्रवाई करेगा तो तोड़फोड़ का सारा खर्चा संबंधित व्यक्ति से वसूल किया जाएगा।
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तोड़फोड़ की कार्रवाई कब की जाएगी अभी इसके लिए कोई तिथि निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि कहा जा रहा है एक सितंबर से तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू हो सकती है। नोटिस चस्पा होने के बाद लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि जब कॉलोनी बसी थी तब निगम ने कार्रवाई क्यों नहीं की। इसके साथ किरायेदार और घरों के मालिक मकानों को खाली करने लगे है। शनिवार को अनेक लोग अपने घरों को खाली करते दिखे। दूसरी तरफ तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर प्रशासन द्वारा ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिए गए हैं। प्रशासन की सख्ती से लोगों में भय का माहौल है।
उपायुक्त ने नियुक्त किए ड्यूटी मजिस्ट्रेट
जिला उपायुक्त जितेंद्र यादव ने एक आदेश जारी कर नगर निगम को जमाई कॉलोनी में अवैध कब्जे हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। उपायुक्त ने अपने आदेश में एक से 10 सितंबर के बीच सरकारी जमीन को खाली करने के आदेश दिए हैं। इस कार्य के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए गए हैं। आदेश के अनुसार नगर निगम के एक्सईएन जीपी वधवा, श्याम सिंह, मनोज कुमार, नितिन कादियान, एसडीओ विनोद मित्तल, अमित चौधरी, सुरेंद्र हुडडा, जगदीश अरोड़ा, खेमचंद, वीरेंद्र पाहिल, नरेंद्र कुमार एवं विनोद सिंह को तोड़फोड़ के दौरान ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी है।
पूर्व मंत्री के संरक्षण में 25 साल पहले बसी थी
सूत्रों की मानें तो गुरुग्राम रोड पर नगर निगम की करीब पांच एकड़ जमीन पर बसी जमाई कॉलोनी एक पूर्व मंत्री के संरक्षण और नगर निगम अधिकारियों की मेहरबानी से बसाई गयी थी। पहले यहां विभिन्न राज्यों से आए चार पांच मजदूर झुग्गी डालकर रहने लगे थे। वह पहाड़ी में पत्थरों की खुदाई आदि करते थे। धीरे धीरे यहां पूरी कॉलोनी बस गई। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस कॉलोनी को बसाने में निगम अधिकारियों और कर्मचारियों लोगों पर मेहरबान रहे।
कमानों का किराया बढ़ा
जमाई कॉलोनी व गुरुकुल कॉलोनी में तोड़फोड़ के आदेश से आसपास की कॉलोनियों और सेक्टर में किराया महंगा हो गया है। एक सप्ताह पहले 1500 रुपये में मिलने वाला एक कमरा अब तीन से चार हजार रुपये में मिल रहा है। साथ ही दो से अधिक परिवार वालों को मकान देने से मना किया जा रहा है। इस वजह से लोग ज्यादा परेशान हैं।
लोगों से बातचीत
मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले हैं। 20 वर्ष पहले यहां एक प्रॉपर्टी डीलर से एक लाख रुपये 80 गज जमीन खरीदी थी। जीवनभर की कमाई लगाकर किसी तरह प्लॉट खरीदा। अब तक करीब चार लाख रुपये बनवाने में लगा दिए। जब ठीक से रहने लगे तो सरकार बिना मुआवजा दिए तोड़ रही है। - समीम, स्थानीय निवासी
मकान तोड़ने के लिए नगर निगम ने दो दिन पहले घरों पर नोटिस लगा दिए। इस कारण मजबूरीवश खाली करना पड़ रहा है। किराये पर कहीं कमरा नहीं मिल रहा है। किराये पर कमरों के दाम पर काफी बढ़ गए है। एक सप्ताह पहले 1500 रुपये में मिलने वाला कमरा अब तीन से चार हजार रुपये में मिल रहा है। - पुष्पा देवी, स्थानीय निवासी
मेहनत मजदूरी कर के पिता ने किसी तरह घर बनाया था। उसी भी सरकार उजाड़ रही है। नौकरी पहले ही छूटी हुई है। बेरोजगार होकर घर बैठा हूं। घर टूटने के बाद समस्या और ज्यादा बढ़ जाएगी। - मोहम्मद कैफ, स्थानीय निवासी
उनका जन्म जमाई कॉलोनी में ही हुआ है। पढ़ाई-लिखाई भी यहीं हुई। घर में दो बहन है। उनकी शादी करनी है। ऊपर से प्रशासन ने मकानों को तोड़ने के आदेश दे दिए। - सोनू, स्थानीय निवासी
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