संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। फरीदाबाद साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र (एफएलसीसी) की ओर से जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में दो दिवसीय साहित्यिक और सांस्कृतिक उत्सव का तीसरा संस्करण जश्न-ए-फरीदाबाद-3 का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यअतिथि के रूप में जेसी बोस के कुलपति प्रो एसके तोमर और वरिष्ठ पत्रकार शंभू नाथ शुक्ला ने लोगों की किताबों से होती दूरी के बारे में अपनी राय रखी।
प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों की वर्तमान प्रासंगिकता विषय पर अपने विचार रखते हुए शंभूनाथ शुक्ला ने बताया कि आज लोग किताबों से दूर और मिथ्या से भरे सोशल मीडिया से जुड़ते जा रहे हैं। इसका समाज पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। कुलपति प्रो. एसके तोमर ने कहा कि रामायण, महाभारत हमें आदर्श जीवन यापन का महत्व बताने के लिए काफी है। जीवा इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डाॅ. ऋषिपाल ने बताया कि भारत में 2600 वर्ष पूर्व से चिकित्सा विधि उन्नत रही है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति बचाने की जरूरत है। एफएलसीसी के अध्यक्ष विनोद मलिक ने कहा कि तीन साल कोरोना महामारी के अंतराल के बाद सांस्कृतिक एवं संस्कृति के संगम जश्न-ए-फरीदाबाद-3 का यह आयोजन किया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत और साहित्य-संस्कृति प्रेमियों को करीब लाना है।
जश्न-ए-फरीदाबाद में शाम के सत्र में बदलती हुई पत्रकारिता पर चर्चा पर वरिष्ठ पत्रकार ने अपनी राय रखी। वरिष्ठ पत्रकार शंभु नाथ शुक्ला ने कहा कि ईमानदार, व्यवस्था के खिलाफ खड़े होकर निष्पक्ष पत्रकारिता की आवश्यकता है। वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ बागी ने कहा कि व्यवस्था से समझौता पत्रकारिता नहीं है।