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फ्लैट खाली करने का नोटिस मिलने पर लोगों ने किया प्रदर्शन

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फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद की एसआरएस रॉयल हिल्स सोसाइटी में रह रहे करीब 3700 फ्लैट धारकों की नींद उड़ गई है। उन्हें अपना घर छिनने का डर सता रहा है। शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोसाइटी में नोटिस चस्पा कर सभी को 10 दिन में फ्लैट खाली करने को कहा है। ऐसे में लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। लिहाजा सोमवार को लोगों ने सेक्टर-16 स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिकारियों से पूछा कि हम लोगों के फ्लैट्स के मालिक कौन हैं, कैनरा बैंक, एसबीआई, ईडी या फिर वे खुद। लोगों का आरोप है कि इसमें लाखों खर्च कर दिए, अधिकांश अभी तक किस्त भी भर रहे हैं, फिर भी बिल्डर की लापरवाही की सजा उन्हें मिल रही है। इससे निजात दिलाई जाए। नौकरी करना मुश्किल हो गया है, रातों की नींद उड़ गई है।
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प्रदर्शन करने पहुंचे लोगों ने कहा कि उन्होंने सात-आठ साल पहले फ्लैट खरीदे थे। अधिकांश: फ्लैट्स की कीमत 40 लाख रुपये या इसके आसपास है। बैंक से ऋण लेने के साथ जैसे तैसे पैसे जुटाकर अपना घर का सपना पूरा किया। ऋण की किस्त भी समय पर भर रहे हैं लेकिन अब ईडी के नोटिस ने परेशानी बढ़ा दी है। घर में बच्चे-बुजुर्ग समेत सभी सदस्य चिंतित हैं। घर खोने के डर से वह न तो सही से खा पा रहे हैं और न ही सो पा रहे हैं। बिल्डर, बैंक आदि की लापरवाही ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
बिल्डर की लापरवाही की सजा फ्लैटधारकों को उठानी पड़ रही है इसलिए सोमवार को एसबीआई पहुंचे। बैंक अधिकारी से मुलाकात कर समस्या के निस्तारण की मांग की है। बैंक अधिकारी ने आश्वासन दिया है।
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- पारस भारद्वाज, स्थानीय निवासी
हमें पता नहीं कि हमारे फ्लैट्स के मालिक कौन हैं। पहले बैंक ने नोटिस दिया, अब ईडी दे रहा है। परेशानी बढ़ गई है। रात की नींद उड़ गई है।
- ललित कुमार, स्थानीय निवासी
हम कह नहीं सकते कि यह हमारा घर है। पहले केनरा बैंक वालों ने नोटिस चस्पाया। अब ईडी दबाव बना रहा है। लोगों ने एसबीआई से लोन लिया है। कागजों को जांच करने पर ही लोन दिया गया है। ऐसे में बिल्डर पर दबाव नहीं बनाकर फ्लैट धारकों पर दबाव बनाया जा रहा है।
- कुणाल गांगुली, स्थानीय निवासी
हम लोग प्रताड़ित हैं। पहले बिल्डर ने परेशान किया। अब बैंक और ईडी परेशान कर रहे हैं। बिल्डर व अधिकारियों की लापरवाही की सजा हम लोग भुगत रहे हैं। हमें न्याय मिलना चाहिए।
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- मनीष, स्थानीय निवासी
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