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Faridabad News: 1 हजार में से 500 टन कूड़े का ही निस्तारण, बन सकता है बंधवाड़ी जैसा पहाड़

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प्रतापगढ़ प्लांट में डंफर कूड़ा लेकर जाते हुए । संवाद
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पिछले महीने केंद्रीय मंत्री के कड़े निर्देशों के बंधवाड़ी नहीं जा रहा शहर का कूड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। दिल्ली-एनसीआर का प्रमुख औद्योगिक शहर फरीदाबाद इस समय एक बेहद गंभीर और संवेदनशील पर्यावरण संकट के मुहाने पर खड़ा है। यह संकट शहर से निकलने वाले सैकड़ों टन घरेलू और औद्योगिक कचरे के सही निस्तारण का न होना है। स्थिति यह है कि यदि नगर निगम ने समय रहते कोई ठोस और व्यावहारिक व्यवस्था नहीं की तो आने वाले कुछ ही महीनों में प्रतापगढ़ क्षेत्र का हाल भी गुरुग्राम रोड पर स्थित बंधवाड़ी जैसा हो जाएगा। यहां भी कचरे का पहाड़ खड़ा होने की पूरी आशंका है।
फरीदाबाद से रोजाना 1 हजार टन कचरा निकल रहा है लेकिन दो प्लांट प्रतापगढ़ व मुजेड़ी पर केवल 500 टन का ही निस्तारण हो पा रहा है। नगर निगम इसको लेकर गंभीरता से काम कर रहा है लेकिन दो बड़े प्लांट लगाने में अभी समय लगेगा, कितना समय लगेगा यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।
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पिछले 13 साल से फरीदाबाद के कूड़े का करीब 60 प्रतिशत बंधवाड़ी डंपिंग साइट पर भेजा जा रहा था लेकिन पिछले महीने केंद्रीय मंत्री के कड़े निर्देशों और लगातार बढ़ती पर्यावरण चिंताओं के बाद फरीदाबाद नगर निगम को वहां अपना कचरा भेजने से पूरी तरह रोक दिया गया। इस अचानक लगी रोक के बाद से नगर निगम के हाथ-पांव फूल गए हैं क्योंकि शहर के भीतर कचरा निस्तारण और प्रोसेसिंग के पर्याप्त इंतजाम पहले से तैयार नहीं थे। मंत्री के आदेश के बाद बंधवाड़ी जाने वाला कचरा तुरंत तो रोक दिया गया लेकिन इसके विकल्प के तौर पर फरीदाबाद के अपने इंतजाम अभी तक अधूरे पड़े हैं।

क्षमता आधी और कचरा दोगुना, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
शहर में कचरे के उत्पादन और उसके निस्तारण की मौजूदा क्षमता में काफी अंतर है। निगम इस समय सॉलिड वेस्ट का सही मैनेजमेंट नहीं कर पा रहा है। फरीदाबाद शहर से रोजाना करीब 1000 टन कचरा निकल रहा है। इसके मुकाबले अगर शहर की मौजूदा निस्तारण क्षमता को देखें तो प्रतापगढ़ प्लांट की क्षमता सिर्फ 350 टन और मुजेसर प्लांट की क्षमता महज 150 टन ही है। यानी दोनों प्लांट मिलकर भी रोजाना सिर्फ 500 टन कचरे का ही निस्तारण करने में सक्षम हैं। ऐसे में फरीदाबाद से हर दिन निकलने वाले कचरे में से करीब 400 से 500 टन कचरा बिना किसी प्रोसेसिंग और निस्तारण के बच रहा है। इस वजह से अकेले प्रतापगढ़ में रोजाना करीब 500 टन अतिरिक्त कचरा एकत्रित हो रहा है। जमीन पर हर दिन जमा हो रहा यह कचरा धीरे-धीरे एक बड़े डंपिंग यार्ड का रूप लेता जा रहा है जिससे आने वाले समय में यहां बंधवाड़ी की तरह ही कूड़े का विशालकाय पहाड़ बनना तय माना जा रहा है।

कागजों में चल रही है तीन बड़े प्लांट की योजना
नगर निगम ने शहर की इस लगातार बढ़ती कचरा समस्या के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान के लिए मुजेरी, प्रतापगढ़ और सौतई में तीन बड़े ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण (सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग) प्लांट स्थापित करने की योजना शुरू की है। निगम के दावों के मुताबिक इन तीनों प्लांटों की कुल क्षमता 1350 टन प्रतिदिन होगी। अधिकारियों का कहना है कि इन प्लांटों के पूरी तरह शुरू होने से बंधवाड़ी डंपिंग साइट पर फरीदाबाद के कचरे का दबाव हमेशा के लिए खत्म होने के साथ ही इलाके में प्रदूषण घटेगा और शहर को एक स्वच्छ व टिकाऊ कचरा प्रबंधन प्रणाली मिलेगी। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि प्लांट को अपग्रेड करने और नए प्लांट लगाने की यह पूरी कार्रवाई अभी सिर्फ सरकारी फाइलों और कागजों में ही चल रही है, धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है।

रोजाना प्रतापगढ़ पहुंच रहे हैं 45 ट्रक
प्रतापगढ़ में रोजाना कूड़े के 45 ट्रक पहुंच रहे हैं यह संख्या पहले काफी कम थी। एक ट्रक में करीब 15 टन कचरा यहां पर पहुंच रहा है। इस हिसाब से रोजाना 675 टन कूड़ा प्लांट में आ रहा है लेकिन प्लांटी की क्षमता 350 से 400 टन कचरा निस्तारण की है। लोगों का कहना है कि अगल जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति गंभीर हो जाएगी।
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जवाब देने से बच रहे अधिकारी
इस मामले को लेकर स्वच्छ भारत मिशन के कार्यकारी अभियंता मंजीत से कई बार कॉल पर बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया वहीं मैसेज का भी कोई रिस्पांस नहीं दिया गया।
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