बल्लभगढ़। एक व्यक्ति को फरीदाबाद से बंगलुरु कार मंगाना महंगा पड़ गया। उसे एक ट्रांसपोर्ट कंपनी से ऑनलाइन बुकिंग भारी पड़ गई। कार बंगलुरु की बजाय मुंबई पहुंच गई। तय रकम से ज्यादा पैसे देने के बाद कंपनी के पते पर जाकर पता किया तो जीएसटी नंबर भी फर्जी निकला। सेक्टर आठ थाना पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर-11 के भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बेटा विशाल चौधरी बंगलुरु में नौकरी करता है। बेटे ने वहां अपनी आई-20 कार मंगाने के लिए सात नवंबर को ऑनलाइन बुकिंग कराई थी। कार फरीदाबाद से बंगलुरु पहुंचाई जानी थी। जिसका किराया 11500 रुपये तय हुआ था। कार्गो कंपनी के संदीप ने सात नवंबर को ही गाड़ी बंगलुरु ले जाने के लिए दोपहर में ड्राइवर मनदीप को घर पर भेज दिया। कार लेकर आए मनदीप को उन्होंने 6000 रुपये भी ऑनलाइन एडवांस दे दिए। 11 नवंबर को जब कार बंगलुरु नहीं पहुंची तो संदीप को फोन किया। मनोज नामक युवक ने कहा कि बाकी पेमेंट करने पर कार मिलेगी। इस पर विशाल ने मनोज को 5500 रुपये भी ऑनलाइन भेज दिए। इस पर मनोज ने जीएसटी के 2070 रुपये मांगे। जीएसटी देने के दो घंटे बाद भी गाड़ी नहीं मिली। दोबारा फोन करने पर कहा कि गाड़ी दो दिन बाद यानि 13 नवंबर को मिल जाएगी क्योंकि गाड़ी गलती से मुंबई पहुंच गई है। 13 नवंबर को मनोज ने कहा कि 20 हजार रुपये और दो तब गाड़ी मिलेगी। आरोपी ने दूसरा बिल दिया जो कि 33630 रुपये का स्काई इनिंग लॉजिस्टिक्स का था। पीड़ित ने कहा कि सौदा 11500 रुपये में हुआ था लेकिन 13500 रुपये दे दिए हैं। आरोपी ने कहा, गाड़ी मुंबई में है। शक होने पर पीड़ित कंपनी के पते पर गुरुग्राम गया। जहां पहले व दूसरी कंपनी के पते फर्जी पाए गए। इसके अलावा उनके द्वारा जो बिल भेजे गए, उसने जीएसटी नंबर को चेक किया तो दोनों कंपनियों के जीएसटी नंबर एक जैसे मिले। यह जीएसटी नंबर किसी और कंपनी का निकला जोकि दो साल पहले बंद हो चुकी है। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।