यथा राजा तथा प्रजा, यह कहावत लघु सचिवालय पर सटीक बैठती है। जिले के लघु सचिवालय के कार्यालयों में कर्मचारी से लेकर अफसर निर्धारित समय के बाद कब तक आएंगे कुछ कहा नहीं जा सकता।
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कर्मचारियों को भी शायद इस बात का अहसास है कि जब साहब ही समय पर दफ्तर नहीं आते तो हमारा कोई क्या बिगाड़ेगा। बहरहाल, प्रशासनिक कार्यालय में इस तरह की कार्यप्रणाली से आमजन परेशान हैं। मंगलवार को संवाददाता जितेंद्र चौहान ने लघु सचिवालय का जायजा लिया।
समय: सुबह 09: 30 बजे
स्थान: लेखाकार कार्यालय
जिला लेखाकार कार्यालय में अक्सर भीड़भाड़ रहती है। जमीन जायदाद से संबंधित काम कराने के लिए लोगों का आना-जाना लगा हुआ था, लेकिन कार्यालय तय समय के आधे घंटे बाद भी सूना पड़ा था। अपने काम कराने के लिए दूर दराज से आने वाले लोग इंतजार कर वापस लौट रहे थे। काफी देर बाद एक पटवारी दफ्तर में पहुंचा।
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मंगलवार सुबह 10:00 बजे भी दफ्तर के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था
खाली पड़ा तहसीलदार का कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
समय: सुबह 10:00 बजे
स्थान: आईसीडीएस सेल
सचिवालय के कमरा नंबर 202 में आईसीडीएस सेल स्थापित है। यहां जिला कार्यक्रम अधिकारी बैठते हैं, लेकिन मंगलवार सुबह 10:00 बजे भी दफ्तर के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था। दफ्तर के बाहर भी कोई कर्मचारी मौजूद नहीं दिखा। हालात देखकर लग रहा था कि दफ्तर कभी-कभी ही खुलता होगा।
समय: सुबह 10:20 बजे
स्थान: तहसीलदार कार्यालय
तहसीलदार कार्यालय के बाहर कई लोग साहब के आने का इंतजार कर रहे थे। तहसीलदार के कार्यालय के बाहर कोई कर्मचारी भी मौजूद नही था, जोकि साहब के बारे में लोगों को जानकारी दे देता। साहब की खाली कुर्सी एसी की ठंडी हवा खा रही थी।
सिटी मजिस्ट्रेट भी लेटलतीफी के मामले में पीछे नहीं दिखे
सीटीएम कार्यालय पर लटका ताला
- फोटो : अमर उजाला
समय: सुबह 10:30 बजे
स्थान: सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय
सिटी मजिस्ट्रेट भी लेटलतीफी के मामले में पीछे नहीं दिखे। सुबह 10:30 बजे भी सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर कुंडी लगी हुई थी। साहब के आने के बारे में कुछ पता नही था। कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने बताया कि साहब आने ही वाले हैं।
समय: सुबह 10:40 बजे
स्थान: अकाउंट विभाग
लघु सचिवालय की तीसरी मंजिल पर स्थित अकाउंट विभाग में लापरवाही का अलग ही नजारा दिख रहा था। 11:00 बजने को थे लेकिन कोई कर्मचारी दफ्तर में दिखाई दिया। अधिकारी महोदय गायब थे। पंखे और लाइट ऑन थी।
लापरवाही पड़ रही भारी
शहर में लगभग सरकारी दफ्तर लघु सचिवालय में है। दफ्तर में पहुंचने का टाइम सुबह 9:00 बजे का है और शाम पांच बजे छुट्टी हो जाती है। कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सरकारी ड्यूटी को सिर्फ औपचारिकता समझते हैं। सुबह घंटाभर लेट आना और शाम को टाइम से पहले निकल जाने के सरकारी बाबू आदी हो गए हैं।
अगर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं पहुंच रहे हैं तो यह चिंताजनक विषय है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा। -कृष्णपाल गुर्जर, सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री
दफ्तर देरी से आने वाले कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। निर्धारित समय पर दफ्तर आने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। मैं खुद जायजा लेकर देखूंगा कि कौन समय पर आता है और कौन देरी से आता है। -चंद्रशेखर, जिला उपायुक्त