शोधित पानी को बागवानी, हरित क्षेत्रों और सिंचाई में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा।्
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एफएमडीए ने शहर की सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सूरजकुंड के बादशाहपुर जोन में करीब 55 करोड़ रुपये की लागत से 20 एमएलडी (दो करोड़ लीटर प्रतिदिन) क्षमता का आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा। इसमें एसबीआर और टर्शियरी ट्रीटमेंट तकनीक का उपयोग होगा, जिससे शोधित पानी को बागवानी, हरित क्षेत्रों और सिंचाई में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। परियोजना पूरी होने के बाद सूरजकुंड क्षेत्र के सीवर नेटवर्क पर दबाव कम होने और गंदे पानी के बेहतर प्रबंधन की उम्मीद है।
पिछले कुछ वर्षों में सूरजकुंड, अनंगपुर, ग्रीन फील्ड कॉलोनी, चार्मवुड विलेज, लक्कड़पुर, पहाड़ी क्षेत्र और दिल्ली सीमा से सटे इलाकों में तेजी से आबादी बढ़ी है। बड़ी संख्या में बहुमंजिला सोसाइटियां, होटल, संस्थान और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने से सीवरेज व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। बरसात के दौरान कई स्थानों पर सीवर ओवरफ्लो और जलभराव की शिकायतें सामने आती रही हैं। नया एसटीपी बनने से इन इलाकों की सीवरेज व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
लाखों लोगों को मिल सकता है अप्रत्यक्ष लाभ
सूरजकुंड इलाके में बड़ी संख्या में आवासीय कॉलोनियां, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां, होटल, शिक्षण संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। ऐसे में लाखों लोगों को बेहतर सीवरेज व्यवस्था और स्वच्छ वातावरण का अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा भविष्य में विकसित होने वाले नए सेक्टरों की जरूरतों को भी यह परियोजना पूरा करने में मदद करेगी।
पर्यटन क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले के कारण देश-विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है। हर वर्ष लाखों पर्यटक यहां आते हैं। इसके अलावा हरियाणा पर्यटन के होटल, निजी रिसॉर्ट, विवाह स्थल और कई संस्थान इसी क्षेत्र में स्थित हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और दक्षिण फरीदाबाद से आने वाले हजारों लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। बेहतर सीवरेज व्यवस्था होने से पर्यटन क्षेत्र की साफ-सफाई में सुधार होगा और बरसात के दौरान जलभराव की समस्या कम होने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक से होगा गंदे पानी का शोधन
परियोजना में एसबीआर और टर्शियरी ट्रीटमेंट तकनीक अपनाई जाएगी। इस प्रक्रिया से गंदे पानी को निर्धारित मानकों के अनुसार साफ किया जाएगा, ताकि उसका दोबारा उपयोग किया जा सके। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) लंबे समय से उपचारित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे नदियों और नालों में प्रदूषण कम होगा तथा भूजल पर निर्भरता भी घटेगी।
मास्टर सीवरेज योजना का हिस्सा
एफएमडीए शहर की मास्टर सीवरेज योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ा रहा है। अप्रैल में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई एफएमडीए की बैठक में भी नए एसटीपी और पुराने संयंत्रों के उन्नयन को मंजूरी दी गई थी। सूरजकुंड का यह एसटीपी भी उसी योजना का हिस्सा है। परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन होगा। इससे नालों में प्रदूषण कम करने, उपचारित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने और भविष्य की बढ़ती आबादी के अनुरूप सीवरेज व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द इस परियोजना का काम जमीनी स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
- समुद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए