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Faridabad News: भजन पार्टियों के जरिये गांव-गांव पहुंचा नारी शक्ति वंदन अभियान

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महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की दी जानकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं को उनके अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिले में नारी शक्ति वंदन अभियान को नई गति मिल रही है। सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत बुधवार को विभिन्न गांवों में भजन पार्टियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

ताजपुर, भूपानी और खेड़ीकलां सहित कई गांवों में पहुंची विभाग की सूचीबद्ध भजन टीमों ने पारंपरिक लोक शैली में महिलाओं को नए कानून की जानकारी दी। लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए यह समझाया गया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने के बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
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कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने हिस्सा लिया और सरल भाषा में दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना। सांस्कृतिक माध्यम से संदेश पहुंचाने की इस पहल को महिलाओं ने सहज और प्रभावी बताया, जिससे जटिल विषय भी आसानी से समझ में आए।

जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी मूर्ति दलाल ने बताया कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी संभव है, जब उनकी जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है और इसी कड़ी में यह अभियान अहम भूमिका निभा रहा है।
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33 प्रतिशत महिला आरक्षण सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव: सीमा त्रिखा



फरीदाबाद। शहर में आयोजित नारी शक्ति सम्मेलन ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक नई ऊर्जा का संदेश दिया। सेक्टर-12 स्थित कन्वेंशन हॉल में आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक सेवा और राजनीति से जुड़ी महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली, जिससे साफ हुआ कि महिला सशक्तिकरण अब केवल नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बनता जा रहा है। कार्यक्रम के संयोजनकर्ता के रूप में पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने कहा कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण समाज में संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने इसे किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश की हर महिला की जीत बताया। उनके अनुसार, समाज का समग्र विकास तभी संभव है जब महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अवसर मिले।
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