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Faridabad News: सदियों का इतिहास समेटे हुए हैं जिले के कई पर्यटन स्थल

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वर्ल्ड टूरिज्म डे: धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध सूरजकुंड का खत्म हो रहा अस्तित्व
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शशि
फरीदाबाद। यूं तो जिले में कई पर्यटन स्थल हैं, लेकिन सरकारी विभागों की उपेक्षा के चलते बीते वर्षों में इनका आकर्षण धूमिल होता जा रहा है। हालांकि, जिले के कई पर्यटन स्थल अपने में सदियों का इतिहास समेटे हुए हैं। बल्लभगढ़ में राजा नाहर सिंह महल पर्यटन स्थल प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गाथा का प्रतीक है। सूरजकुंड सरकारी उपेक्षा के चलते अपना अस्तित्व बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाली बड़खल झील पूरी तरह से सूख चुकी है। हर साल हरियाणा पर्यटन विभाग की ओर से 27 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर सभी पर्यटन केंद्रों पर पर्यटकों की आवा भगत करने के लिए कई सुविधाएं और मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके बारे में जानना युवा पीढ़ी के लिए बेहद जरूरी है।




राजा नाहर सिंह महल
बल्लभगढ़ में राजा नाहर सिंह महल पर्यटन केंद्र हरियाणा पर्यटन निगम के लिए भले ही एक रेस्टोरेंट बनकर रह गया हो, लेकिन अगर राजा नाहर सिंह के इतिहास पर नजर डाले तो यह काफी गौरवमयी है। राजा नाहर सिंह प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी क्रांतिकारी नायक थे, जिन्हें नौ जनवरी 1858 को दिल्ली के चांदनी चौक में अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी।
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अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला
सूरजकुंड के नाम पर अरावली की वादियों के बीच प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला लगाया जाता है। लेकिन सूरजकुंड और उसका इतिहास मिटने को है। सूरजकुंड के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों का कारोबार होता है। लेकिन इसके संरक्षण के लिए सरकार की ओर से ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। सरकारी उपेक्षा का आलम ऐसा कि अब यह झील पूरी तरह से सूख चुकी है। कुंड के पत्थर उखड़ गए हैं। सूरजकुंड का निर्माण 10वीं सदी में तोमर वंश के राजा सूरज पाल ने करवाया था। उन्होंने सूर्य देवता की आराधना करने के लिए इसका निर्माण करवाया था।


बड़खल झील
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और फिल्म अभिनेता देवानंद जैसी हस्तियों का पसंदीदा पर्यटन केंद्र बड़खल झील रही है। यह झील दिल्ली एनसीआर में प्रमुख पर्यटन केंद्र रही है, लेकिन यह भी सरकारी उपेक्षा के चलते उजड़ चुकी है। हालांकि, सरकार फिर से इसका सौंदर्यीकरण करने में जुटी हुई है। फिलहाल झील में पानी भी आना शुरू हो गया है। यह प्राकृतिक झील थी, इस झील के पास ही महर्षि पाराशर की तपोभूमि परसोन मंदिर है। बड़खल झील प्रदेश के सबसे पुराने पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां 90 के दशक की कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई है।
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मोहब्बताबाद झील

अरावली की पहाड़ियों के नीचे बसा गांव मोहब्बताबाद उद्दालक मुनि की तपोभूमि है। यहां प्राकृतिक झरने के साथ उद्दालक मुनि की गुफा भी मौजूद है। इस गुफा के ऊपर हवा में झूलता पत्थर यहां आने वाले पर्यटकों को आश्चर्य चकित करता है। लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण यह पर्यटन स्थल भी बर्बाद हो गया है। यहां अवैध खनन के कारण यह प्राकृतिक झरना कृत्रिम झरना बनकर रह गया है। यहां सदियों पहले पाखल तक सात कुंड हुआ करते थे। लेकिन यहां सरकार डंपिंग यार्ड बनाकर इस पर्यटन स्थल को समाप्त करने में लगी है। इसके अलावा जंगल के अंदर बने सरकारी अधिकारियों और नेताओं के फार्महाउस जंगल के लिए खतरा हैं।
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