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Faridabad News: लीड- गेहूं खरीद की नई गेट पास नीति से मंडी एसोसिएशन नाराज

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-कहा, बायोमीट्रिक अनिवार्यता के चलते खरीद प्रक्रिया में होगी देरी, किसानों की बढ़ेगी परेशानी
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शेरसिंह डागर
नूंह। गेहूं खरीद सीजन से पहले सरकार की नई गेट पास नीति को लेकर मंडियों में असमंजस की स्थिति बन गई है। अनाज मंडी एसोसिएशन के साथ-साथ अब किसान भी इस व्यवस्था को लेकर नाराज हैं। उनका कहना है कि बायोमीट्रिक अनिवार्यता के चलते खरीद प्रक्रिया में देरी और परेशानी बढ़ सकती है।
मंडी एसोसिएशन के पदाधिकारी सतपाल सिंगला, लक्ष्मण सिंह ने कहा कि नई नीति के तहत अब मंडी में गेट पास केवल उसी किसान को मिलेगा, जिसके नाम पर फसल का पंजीकरण है। इसके साथ ही किसान की मौजूदगी और बायोमीट्रिक सत्यापन (अंगूठा निशान) जरूरी किया गया है। यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से कई समस्याएं खड़ी कर सकती है। उन्होंने बताया कि गांवों में अक्सर जमीन महिलाओं, बुजुर्गों या बाहर नौकरी करने वाले लोगों के नाम होती है। ऐसे में हर बार संबंधित व्यक्ति का मंडी में उपस्थित होकर बायोमीट्रिक कराना संभव नहीं है। इससे खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। मंडी एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि गेहूं खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके और किसी भी वर्ग को परेशानी न हो।
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किसानों की प्रतिक्रिया :
किसान हेमराज नम्बरदार, भगतसिंह, रविन्द्र पंवार, इलियास, सूबे खान,इस्लाम पंच, जुबेर, आस मोहम्मद ने भी इस नई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इनका कहना कि अगर जमीन बुजुर्ग पिता या मां के नाम है, तो उन्हें हर बार मंडी लाना मुश्किल है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी। पहले ही मंडियों में लंबी लाइनें लगती हैं, अब बायोमीट्रिक की शर्त से और देरी होगी।

आढ़तियों की चिंता :
आढती रघुराज, कमल गोयल, शेरसिंह, जुगल किशोर का कहना है कि इस नियम से मंडी में कामकाज की गति धीमी पड़ेगी और सीजन के पीक समय में अव्यवस्था फैल सकती है। सरकार का यह फरमान नौसिखिया है। अधिकारी एसी कमरों में बैठकर नए-नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे न केवल लोगों को अवस्था का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। किसानों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है लेकिन अधिकारी सरकार को गुमराह करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे।
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इस बारे मार्केट कमेटी के उपाध्यक्ष थानसिंह का कहना है कि नई गेट पास नीति पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़ा रोकने के उद्देश्य से लागू की गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि फसल वास्तविक किसान द्वारा ही बेची जा रही है। यदि कहीं व्यवहारिक दिक्कत आती है, तो सरकार स्तर पर समाधान पर विचार किया जा सकता है। मार्केट कमेटी सचिव मनोज कुमार का कहना है जो आदेश आएंगे उन पर अमल किया जाएगा।
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