खालिस्तान समर्थक अपने मंसूबों को परवान चढ़ाने के लिए कनाडा से छोटे दुकानदारों को पैसे भेज रहे हैं। दो दिन पहले 12 मार्च को गांव डीग निवासी करमचंद के घर पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की टीम ने छापा मारा था। एक वर्ष पहले अगस्त 2023 में गांव फतेहपुर बिल्लौच निवासी कृष्ण के खाते में कनाडा से 45 हजार रुपये आए थे। केबल ऑपरेटर योगेंद्र ने यह रकम उसके खाते में डलवाई थी। करमचंद भी आरोपी योगेंद्र का दोस्त है। एनआईए ने कड़ी पूछताछ के बाद करमचंद को छोड़ दिया है।
कनाडा से पैसे आने वाले मामले में एनआईए की टीम योगेंद्र के दोस्त करमचंद के साथ परिवार वालों से भी पूछताछ कर रही है। टीम दुकानदार करमचंद को अपने साथ दिल्ली मुख्यालय ले गई थी। पूछताछ करने के बाद मंगलवार देर शाम को छोड़ दिया गया। करमचंद के परिजनों का कहना है कि योगेंद्र ने विदेश से पैसे मंगाए थे, उन्होंने करमचंद को निर्दोष बताया। स्थानीय पुलिस का कहना है कि हरियाणा में इस तरह के पहले भी मामले आए हैं। इनमें कनाडा से खालिस्तानी समर्थक अपने मंसूबे पूरे करने के लिए छोटे दुकानदारों के खाते में पैसे भिजवाते हैं।
तीनों में है गहरी दोस्ती
12 मार्च को एनआईए की टीम भोर में ही फरीदाबाद पहुंच गई। सदर थाने की पुलिस टीम के साथ मिलकर डीग गांव निवासी परचून दुकानदार करमचंद के घर पर छापा मारा। करमचंद (33) घर पर था। उसके व परिजनों के मोबाइल की जांच की। करमचंद के परिजनों ने बताया कि साल 2023 में गांव फतेहपुर बिल्लौच के रहने वाले कृष्ण के खाते में कनाडा से 45 हजार रुपये बैंक खाते में आए थे। कृष्ण पहले गांव डीग निवासी योगेंद्र के साथ केबल का काम करता था। उसके बाद कृष्ण ने गांव में अपनी केबल की दुकान खोल ली। आरोपी योगेंद्र, कृष्ण और कमरचंद अच्छे दोस्त है।
हत्या के मामले में जेल में बंद है योगेंद्र
पहले विदेश से आए पैसों के मामले में 27 सितंबर 2023 को कृष्ण और उसके परिवार वालों से पूछताछ की थी। उसके बाद आरोपी योगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी योगेंद्र अभी हत्या के मामले में जेल में बंद है। मंगलवार को भी एनआईए की टीम ने उसी विदेशी पैसों के मामले में उनके दोस्त करमचंद से पूछताछ की।