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कैसे मिले आशियाना : लुटते रहे निवेशक, प्रशासन बना रहा लाचार

Thu, 28 Apr 2016 08:07 AM IST
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
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- फोटो : डेमो फोटो
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ग्रेटर फरीदाबाद में घर का सपना देखना निवेशकों को भारी पड़ा। कागजों में आलीशान प्रोजेक्ट दिखाकर तीन साल में ही बिल्डरों ने खरीदारों से फ्लैटों की 80 फीसदी राशि वसूल ली। दस साल बाद भी 15 हजार निवेशकों का ग्रेफ में आशियाना बसाने का सपना अधूरा है।
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छह साल से निवेशक अपने हक के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन आज तक बिचौलिए की भूमिका से आगे नहीं बढ़ पाया। नतीजतन, बिल्डरों की मनमानी लगातार जारी है।

सुनवाई न होने से नाराज ग्रेटर फरीदाबाद के निवेशक कई बार सड़क पर उतरे। आंदोलन भी किया, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ। जिंदगीभर की जमापूंजी लगाए बैठे निवेशकों को न उनका फ्लैट मिला और न ही बिल्डरों से पैसा वापस मिल रहा है।
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वेशकों के तेवर उग्र होने पर प्रशासन एक्शन मोड में आता जरूर है, लेकिन नोटिस जारी करने और बिल्डरों-खरीदारों की मीटिंग से आगे बात नहीं बढ़ पाती। आज तक एक भी बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

शिकायतों का अंबार, कार्रवाई शून्य
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के पास बिल्डरों की शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। बिल्डर-निवेशक विवाद को सुलझाने के लिए मनोहर सरकार ने पिछले वर्ष कुछ गंभीरता दिखाई थी। सरकार के आदेश पर जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी में डीसी के अलावा एसडीएम, डीटीपी सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया, लेकिन कमेटी भी सिर्फ कागजों में काम करती दिख रही है। इसकी गिनीचुनी बैठकों में निवेशक अपना रोना रोकर रह जाते हैं।

चार महीने में 90 एफआईआर दर्ज
जमीन जायदाद के कारोबार में कदम-कदम पर धोखा हो रहा है। इसका ताजा उदाहरण पुलिस के आंकड़े दे रहे हैं। इस साल जनवरी से अप्रैल तक चार महीने में 90 मामले दर्ज हो चुके हैं। धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत दर्ज हुए मामलों में 50 से ज्यादा बिल्डरों के खिलाफ बताए जा रहे हैं। अगर बात करें पिछले वर्ष की, तो जमीन की धोखाधड़ी के 349 मामले दर्ज हुए हैं।

ऐसे हो रहा गड़बड़झाला
:-ग्रेटर फरीदाबाद में करीब 20 बिल्डर प्रोजेक्ट हैं। इनमें से कई के लाइसेंस की समय सीमा खत्म हो चुकी है। लाइसेंस रिन्यू नहीं कराए गए हैं। शिकायत मिलने पर भी प्रशासन चुप।
:-सुपर एरिया, क्लब हाउस और वाईफाई जैसी सुविधाओं के नाम पर लाखों रुपये डकार रहे बिल्डर, निवेशकों के न चाहने पर भी जबरन थोपे जा रहे एक्स्ट्रा चार्ज।
:-बुकिंग के समय दी गई समय सीमा से काफी लेट चल रहे अधिकांश प्रोजेक्ट। कई का काम रुका हुआ है, शिकायतों के बाद भी प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई।
:-पेमेंट डिले होने पर निवेशकों से वसूला जा रहा 24 प्रतिशत ब्याज, लेकिन पजेशन में देरी पर हाथ खड़े कर रहे बिल्डर। निवेशकों को नहीं मिल रहा फायदा।
:-नियमानुसार पार्किंग के लिए नहीं बेचा जा सकता ओपन स्पेस, लेकिन ओपन पार्किंग के नाम पर वसूले जा रहे लाखों रुपये। कवर्ड पार्किंग की दरें दोगुनी।

ग्रेटर फरीदाबाद के निवेशकों की शिकायत पर नियमित मीटिंग बुलाई जा रही हैं। बिल्डरों को जल्द से जल्द अपने प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए कहा गया है, ताकि निवेशकों को उनके फ्लैट मिल सकें। इसके अलावा कई लोगों की शिकायतें प्रोजेक्ट में लगे मैटेरियल की गुणवत्ता को लेकर हैं। इस पर भी कार्रवाई की जा रही है।-महाबीर प्रसाद, एसडीएम, फरीदाबाद

अपने हक के लिए हजारों निवेशक लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। बिल्डरों ने राजनीतिक संरक्षण में पूरी प्लानिंग के साथ तीन साल में ही अपने प्रोजेक्ट की 90 फीसदी रकम वसूल ली। खरीदार आज भी अपने आशियाने के लिए दर दर भटक रहा है। मैंने खुद बीपीटीपी के प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था, जिसका पजेशन मुझे आज तक नहीं मिला है। 10 से 12 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ अलग डाल दिया।-रेनू खट्टर, महासचिव, ग्रेफ रेजिडेंट्स एसोसिएशन

ग्रेटर फरीदाबाद की समस्या तत्कालीन सरकार की देन है। पहले किसानों से बिल्डरों ने सीधे जमीन खरीदने का एग्रीमेंट कर लिया, लेकिन बाद में वही जमीन सरकार ने दाखिल खारिज कर कोढ़ियों के भाव जबरन अधिग्रहीत कर बिल्डरों को महंगे दाम पर बेच दी। नतीजतन किसानों ने अपने हक के लिए आंदोलन शुरू कर दिया, जिसके चलते बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट लेट करने का बहाना मिल गया। -शिवदत्त वशिष्ठ, अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति ग्रेटर फरीदाबाद

अपना मंच
बीपीटीपी ने सेक्टर-80 में डिस्कवरी पार्क प्रोजेक्ट लांच किया था, जिसमें मैंने 2012 में फ्लैट बुक कराया था। नियमानुसार चार साल के अंदर मुझे पजेशन मिल जाना चाहिए, लेकिन इस प्रोजेक्ट के दस में से कोई भी टावर अब तक कंपलीट नहीं हुआ है। मेरा फ्लैट बी टावर में बुक है। 21 मंजिला इस टावर का अभी बेसमेंट और दो मंजिल का स्ट्रक्चर ही खड़ा हो पाया है। -केके पांडे, निवेशक

ग्रेटर फरीदाबाद में निवेश करने का फैसला गलत साबित हुआ। मैंने 2012 में पीयूष हाइट के प्रोजेक्ट में फ्लैट लिया था। उस समय बिल्डर ने जो स्टेटमेंट दी थी, उसमें 1.27 लाख रुपये का बकाया बताया गया था। जब पजेशन ऑफर का लेटर दिया, तो उसमें यह राशि बढ़ाकर 6.42 लाख रुपये कर दी गई। तमाम ऐसी चीजों के नाम पर पैसा मांगा गया, जिसकी मुझे जरूरत नहीं थी।-धीरेंद्र सिंह, निवेशक

सेक्टर-78 के ईरा रेडवुड रेजिडेंसी प्रोजेक्ट में मैंने 2006 में फ्लैट बुक कराया था। 750 फ्लैट बनाए जाने थे, लेकिन 350 फ्लैट बने ही नहीं। महंगे किराये से बचने के लिए आधी-आधूरी सुविधाओं के बीच हमने यहां रहना शुरू कर दिया। कई साल हो गए, जिन सुविधाओं के नाम पर पैसा वसूला गया, वह बिल्डर ने आज तक उपलब्ध नहीं कराई हैं। हर जगह शिकायत कर चुके हैं।-एसके दलाल, निवेशक
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