फरीदाबाद नहर पार ग्रेटर फरीदाबाद में आशियाने के लिए दिल्ली सहित एनसीआर के हजारों लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। यहां अपने प्रोजेक्ट लेकर आए ज्यादातर बिल्डरों ने निवेशकों को 2009 में पजेशन देने का वादा किया था, लेकिन 15 हजार निवेशक घर के लिए आज भी धक्के खा रहे हैं।
हालांकि, प्रोजेक्ट विलंब होने के पीछे बिल्डर ग्रेटर फरीदाबाद के विकास की धीमी रफ्तार को जिम्मेदार मानते हुए सरकारी एजेंसियों पर ठीकरा फोड़ रहे हैं, लेकिन प्रोजेक्ट विलंब होने के पीछे दूसरी वजह भी है। दरअसल, अधिकांश बिल्डरों ने एक प्रोजेक्ट की रकम दूसरे कई प्रोजेक्ट में डायवर्ट कर दी। प्रॉपर्टी बाजार में आई मंदी के कारण बिल्डरों के नए प्रोजेक्ट मार्केट से पैसा नहीं खींच पाए और पुराने प्रोजेक्ट भी अधूरे पड़े हुए हैं।
निवेशकों का पैसा पहुंचा विदेश
ग्रेटर फरीदाबाद और फरीदाबाद में बिल्डरों के 24 प्रोजेक्ट बताए जाते हैं। 35 हजार यूनिट बनाकर देने की योजना इन बिल्डरों ने बनाई थी, जिनमें से करीब 25 हजार यूनिटों की बुकिंग 2006 के आसपास हो चुकी थी। तीन साल के अंदर बिल्डरों ने प्रोजेक्ट तैयार कर पजेशन देने का दावा किया था। इस दौरान फ्लैट की 90 फीसदी राशि निवेशकों से वसूली जा चुकी थी। प्रॉपर्टी बाजार में बूम को देखते हुए बिल्डरों ने एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में फंसा दिया। बताया जा रहा है कि कई नामी बिल्डरों ने निवेशकों का पैसा विदेशों में भी इन्वेस्ट कर दिया। 2010 के आसपास प्रॉपर्टी बाजार में आई मंदी के चलते नए प्रोजेक्ट में निवेश करने से खरीदारों ने हाथ खींच लिए। इसका असर ये हुआ कि पुराने प्रोजेक्ट भी अधर में लटके रहे।
जमीन भी बनी अड़चन
ग्रेटर फरीदाबाद में 7500 एकड़ जमीन पर 15 नए सेक्टर विकसित किए जाने थे। करीब 2500 एकड़ जमीन पर 20 बिल्डरों के प्रोजेक्ट विकसित होने थे। 2013 तक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण महज चार सेक्टरों के लिए ही जमीन अधिग्रहीत कर पाया था। इससे पहले ही कई बिल्डरों ने अपने प्रोजेक्ट शुरू कर दिए। 2006 में बुकिंग भी शुरू कर दी। 2009 में अधिकांश बिल्डरों को पजेशन देनी थी लेकिन एकाध को छोड़कर किसी ने खरीदारों को उनका फ्लैट नहीं दिया। ग्रेटर फरीदाबाद में विकास कार्य आज तक पूरे नहीं हुए।
डीटीपी ने किया बीपीटीपी का दौरा
बीपीटीपी के खिलाफ निवेशकों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बीपीटीपी पार्क एलाइट प्रोजेक्ट के निवेशकों की शिकायत पर डीटीपी प्लानिंग अमरीक सिंह के नेतृत्व में दौरा किया गया। निवेशक रेनू खट्टर ने बताया कि बिल्डर ने सुपर एरिया के नाम पर पैसा ले लिया लेकिन एरिया बढ़ाया नहीं है। प्लानिंग विभाग की टीम ने फ्लैटों का मेजरमेंट किया। निवेशकों के मुताबिक अभी 2900 लोगों को पजेशन नहीं मिली है। इनमें से 80 निवेशकों ने बिल्डर के खिलाफ थाने में शिकायत दी है।
क्या कहते हैं बिल्डर प्रतिनिधि
ग्रेटर फरीदाबाद के प्रोजेक्ट विलंब होने के पीछे मार्केट के हालात भी हैं। पहले जमीन को लेकर खींचतान चली, इसके बाद लोन को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 57 फीसदी यूनिट्स की डिलीवरी दे दी है। प्रोजेक्ट विलंब होने पर हम एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक निवेशकों के नुकसान की भरपाई करेंगे।- रोहित मोहन, एजीएम (मार्केटिंग) बीपीटीपी
फरीदाबाद या ग्रेटर फरीदाबाद में बिल्डरों के प्रोजेक्ट विलंब होने की कई वजह हैं। आठ-नौ साल पहले एनसीआर में एक साथ कई हजार यूनिट्स का निर्माण कार्य शुरू हो गया। इसके चलते लेबर की कमी सामने आई। इसके अलावा प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले कई औपचारिकताओं को पूरा करने में काफी समय लगा। हालांकि, इन सबके बावजूद अपने सभी प्रोजेक्ट समय पर पूरे कर दिए।- संजीव ग्रोवर, एवीपी, एसआरएस ग्रुप
ग्रेटर फरीदाबाद के विकास की धीमी रफ्तार निवेशकों की परेशानी के लिए जिम्मेदार है। कई प्रोजेक्ट पूरे भी हो गए लेकिन सड़क, बिजली, पानी की सुविधा न होने से निवेशकों ने पजेशन नहीं लिया। आज भी हालात जस के तस है। वर्ष 2006 में निवेशकों के बढ़े रुझान से उम्मीदें जागी थीं, लेकिन अब बिल्डर और निवेशक दोनों ही परेशान हैं।-राजेश जैन, मैनेजर कॅमर्शियल, आरपीएस ग्रुप
अपना मंच
बीपीटीपी पार्क एलाइट प्रोजेक्ट में मैंने 2009 में फ्लैट बुक कराया था। बुकिंग के समय 2012 में पजेशन देने का वादा किया गया था, लेकिन चार साल बाद भी पजेशन नहीं मिला है। इस मामले की शिकायत प्रशासन से कई बार की जा चुकी है। बिल्डर की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि जो सुविधाएं देने का दावा किया था वो है नहीं।- रेनू खट्टर निवेशक
2006 में मैंने सेक्टर 89 पीषूय हाइट में फ्लैट बुक कराया था। बिल्डर ने 2009 में पजेशन देने का वादा किया था, लेकिन आज तक प्रोजेक्ट कंपलीट नहीं हुआ है। कुल 16 टावर बनाए जाने हैं, जिनमें से 6 टावर अभी अधूरे हैं। फाइनल डिमांड तीन लाख रुपये की थी जो बिल्डर ने बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है। जो टावर कंपलीट हैं उनमें भी निवेशक पजेशन लेने को तैयार नहीं है।- धीरज जैन, निवेशक
मैने 2006 में सेक्टर 89 के पाल ग्रुप के प्रोजेक्ट में फ्लैट की बुकिंग कराई थी। फ्लैट की आधी कीमत का भुगतान कर चुका हूं। बिल्डर ने तीन साल के अंदर पजेशन देने का वादा किया था लेकिन दस साल बाद भी फ्लैट नहीं मिला है। बिल्डर ने प्रोजेक्ट में देरी पर भुगतान करने का आश्वासन भी दिया था। आज तक न तो फ्लैट मिला है और न ही पैसा वापस मिला है।- रविंद्र कुमार, निवेशक
सेक्टर-88 के आरपीएस ग्रुप के प्रोजेक्ट में मैंने 2007 में फ्लैट बुक कराया था। 2010 में पजेशन देने का दावा किया गया था, लेकिन आज तक मुझे फ्लैट नहीं मिला है। इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से भी की गई। न्याय के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया। बिल्डर पजेशन देने को तैयार है लेकिन तीन लाख रुपये ज्यादा मांगे जा रहे हैं।- सीमा जोशी, निवेशक