फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद स्थित डिस्कवरी सोसायटी में बृहस्पतिवार रात 17वीं मंजिल से कूदकर 10वीं के छात्र ने जान दे दी। छात्र ने सुसाइड नोट में लिखा है कि इस स्कूल ने उसे मार दिया। उसने प्रधानाध्यापिका व अन्य को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है।
पुलिस के मुताबिक 16 वर्षीय गौरव (बदला हुआ नाम) डिस्कवरी सोसायटी में अपनी मां के साथ रहता था। वह डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद का छात्र था। मां इसी स्कूल में ललित कला की अध्यापिका है। उन्होंने बताया कि 23 फरवरी को गौरव की विज्ञान की परीक्षा थी। उसने प्रश्न समझने के लिए प्रधानाध्यापिका ममता गुप्ता से मदद मांगी। आरोप है कि उन्होंने गौरव को डांटा और कहा कि वह बीमारी का फायदा उठा रहा है। इसके बाद वह स्कूल नहीं जाना चाहता था, लेकिन मां के काफी समझाने के बाद मान गया।
बृहस्पतिवार रात गौरव की मां अपने पिता को दवाई देने उनके घर गई थी। पीछे से रात करीब दस बजे गौरव ने सोसायटी की 17वीं मंजिल से छलांग लगा दी। सोसायटी निवासियों ने उसे सेक्टर आठ एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया। थाना बीपीटीपी प्रभारी अर्जुन देव ने बताया कि ममता गुप्ता व स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया है।
मैं मजबूत नहीं हूं, मैं कमजोर हूं , मुझे खेद है...
प्रिय मम्मा, आप इस ग्रह की सबसे अच्छी मां हैं। मुझे खेद है कि मैं बहादुर नहीं बन सका। इस स्कूल ने मुझे मार डाला है। मैं इस नफरत भरी दुनिया में नहीं रह सकता। मैंने जीने की पूरी कोशिश की, लेकिन लगता है कि जिंदगी को कुछ और चाहिए। लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं, इस पर विश्वास न करें। आप सबसे अच्छी हो। परिवार को उसकी शारीरिक मनोदशा और उसके साथ जो हुआ उसके बारे में बताना। कौन क्या कहते हैं परवाह मत करो। अगर वह मर जाए तो अपने लिए एक नई नौकरी ढूंढ़ लेना। आप कलाकर हो इसे जारी रखना। आप फरिश्ता हैं, आपको इस जन्म में पाकर मैं धन्य हूं। मैं मजबूत नहीं हूं, मैं कमजोर हूं , मुझे खेद है...।
गे कहकर बुलाते थे साथी
गौरव की मां ने शिकायत में कहा कि स्कूल के छात्र उनके बेटे को गे बुलाते थे। इस बारे में स्कूल प्रबंधन को शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। मौखिक रूप से भी उन्होंने कई बार इस बारे में बात की लेकिन कोई फर्क नही पड़ा। लगातार प्रताड़ना से गौरव डिप्रेशन में आ गया और फिलहाल उसका इलाज चल रहा था।