फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। कोरोना महामारी के चलते जहां लोग अस्पताल में बेड नहीं मिलने के कारण दम तोड़ रहे हैं, वहीं कुछ मरीज ऐसे भी हैं जो अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद ठीक नहीं हो रहे हैं। इन मरीजों के ठीक नही होने के पीछे संक्रमण के साथ-साथ इलाज में कोताही भी है। इसका खुलासा रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले गिरोह से पूछताछ में हुआ है। उन्होंने बताया कि वे मरीज को आधा इंजेक्शन लगाते थे और बाकी को बेच देते थे।
क्राइम ब्रांच सेक्टर-56 द्वारा पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह अस्पताल में मरीजों के लिए इंजेक्शनों के स्टॉक में गड़बड़ी करते थे। इंजेक्शन की मांग ज्यादा होने के कारण वे मरीज को आधा या उससे भी कम इंजेक्शन लगाते थे, बाकी बचे हुए इंजेक्शन को बाहर महंगे दामों पर बेच देते थे। आरोपियों ने यह भी कबूला की कई बार रिकार्ड में चढ़ाकर इंजेक्शन खुद ही ले जाते थे। किसी को उन पर शक नहीं होता था और वे आसानी से अपने काम को अंजाम दे रहे थे। चारों आरोपी एशियन अस्पताल के नर्सिंग स्टॉफ में कार्यरत थे। इनमें गांव अनखीर निवासी संतोष कुमार, लवकुश और ओमप्रकाश का नाम शामिल है। उनके पास से क्राइम ब्रांच ने मौके पर छह इंजेक्शन बरामद किए। बाकी के दस इंजेक्शन व एक साथी तपन को उनकी निशानदेही पर पकड़ा गया।
दूसरे मामले में क्राइम ब्रांच बदरपुर बार्डर प्रभारी सेठी मलिक ने बताया कि उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले गिरोह की सूचना मिली थी। उन्होंने सेक्टर-16ए में इंजेक्शन बेचने आए तीन युवकों को दबोच लिया। इनमें गांव बामनी खेड़ा निवासी विरेंद्र, डबुआ कालोनी निवासी भूपेंद्र और एसजीएम नगर निवासी पवन शामिल हैं। आरोपियों के पास से चार इंजेक्शन बरामद किए। पूछताछ में पता चला कि भूपेंद्र सर्वोदय अस्पताल में इंजेक्शन का लेखा-जोखा रखता था। रिकार्ड में गड़बड़ी करके इजेक्शन गायब कर देता था। बाकी दो उसके साथी हैं। सभी से पूछताछ की जा रही है।