फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुलंद हौसले: पैर में रॉड डलने पर भी नहीं छोड़ा अभ्यास

विज्ञापन
विज्ञापन
- एशियाई खेल में 3000 मीटर बाधा दौड़ में प्रीति लांबा ने जीता पदक, परिवार में खुशी का माहौल
विज्ञापन


अवध किशोर श्रीवास्तव

फरीदाबाद। पेट्राल पंप पर काम करने वाले जवां गांव निवासी जगदीश की बेटी प्रीति लांबा ने एशियाई खेलों के 3000 मीटर स्टीपल चेज यानि बाधा दौड़ में कांस्य पदक जीता है। वर्ष 2017 में प्रीति के पैर में रॉड डलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अभ्यास करती रहीं। आज उसी का परिणाम है कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रौशन किया है।
पदक जीतने की सूचना मिलते ही उनके परिवार के सदस्य झूम उठे। पिता जगवीर लांबा का कहना है कि आज पूरा देश मुझे मेरी बेटी के नाम से जानता है। यह पिता के लिए गर्व की बात है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कई पदक जीत चुकी है। एशियाई खेल की तैयारी के लिए बंगलूरू ट्रेनिंग सेंटर में पिछले कई महीनों से पसीना बहा रहीं थी। वर्ष 2008 में उन्होंने एथलेटिक्स का प्रशिक्षण शुरू किया था। नौ महीने के बाद ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियाेगिता में पहला स्वर्ण पदक जीती। वर्ष 2019 में साउथ एशियन गेम्स में पदक जीता। वर्ष 2022 में जर्मनी में आयोजित विश्व रेलवे क्राॅस कंट्री में र्स्वण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। संवाद
विज्ञापन




खो-खो में भी आजमा चुकी हैं किस्मत

स्कूल स्तर से खेलकूद प्रतियोगिता में रुची थी। उन्होंने स्कूल टीम में खो-खो से खेलना शुरू किया था। पहली बार स्कूल के कोच ने उन्हें मैच में खेलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने स्कूल के कोच से आग्रह कर दूसरी बार आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उस दौरान उन्होंने सात मिनट में मैच का रुख ही पलट दिया था। उसके बाद से वह स्कूल प्रतियोगिता में अपनी पहचान बना ली।



15 वर्ष की आयु में छोड़ दिया था घर

एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए उन्होंने 15 वर्ष की आयु में अपना घर छोड़ दिया था। पहली बार उन्होंने भोपाल में जूनियर कैंप में हिस्सा लिया था। उन्होंने बंगलूरू साई सेंटर में प्रशिक्षण लिया। इससे पहले वह जवा गांव और सेक्टर 12 खेल परिसर में अभ्यास करती थीं।



उधार लेकर बेटी को बनाया अंतरराष्ट्रीय धावक

प्रीति के पिता राजीव नगर स्थित एक पेट्रोल पंप पर काम करते हैं। उनकी मासिक आय करीब 10 हजार रुपये है। आय कम होने के बावजूद उन्होंने कभी भी प्रीति को किसी भी वस्तु की कमी महसूस नहीं होने दिए। वह कर्ज लेकर भी उनकी सारी जरूरतें पूरा करते रहें। उन्होंने बताया कि परिवार में माता-पिता के अलावा दो भाई और दो बहन है। इतने पैसे में घर चलाना किसी भी चुनौती से कम नहीं था।



पैर टूटने के कारण नहीं ज्वाइन कर पाईं पहली नौकरी

प्रीति का कहना हैं कि 18 मार्च 2017 में पहली बार मुझे विलासपुर में रेलवे की नौकरी मिली थी। उसी दिन अभ्यास के दौरान मेरा दाहिना पैर टूट गया। ऑपरेशन के माध्यम से पैर में रॉड डाली गई है। डॉक्टरों ने मुझे अभ्यास करने से मना कर दिया था, लेकिन फरवरी 2018 में दोबारा से अभ्यास शुरू कर दिया है। इसके कुछ दिनों के बाद ही फेडरेशन कप में पदक जीता।

कोरोना काल में छोड़ दिया था अभ्यास

उन्होंने बताया कि कोराना काल में अभ्यास पूरी तरह छोड़ दिया थी। घर पर ही शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने के लिए योग और मेडिटेशन करती थींए लेकिन अपने हौसले मजबूत रखे थे। उसके बाद होने वाले सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रहीं हैं।
विज्ञापन




शहर के सभी खिलाड़ियों ने किया नाम रौशन

जिले से शिवा, आदर्श और रिदम सांगवान और एथलीट प्रीति ने खेल में हिस्सा लिया था। सभी खिलाड़ियों ने एशियाई खेल में फरीदाबाद का नाम रौशन किया है। शूटिंग में जिले के सभी खिलाड़ियों ने टीम इवेंट में पदक झटक चुके हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें