- आठ महीने में हुए 10 लोग अरेस्ट, कार्रवाई के नाम पर जांच पर अटकी रहती है पुलिस, महीनों बाद दर्ज होते हैं केस
धनंजय चौहान
फरीदाबाद। शहर में अपराधियों द्वारा अब लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। इनमें से सबसे नया तरीका डिजिटल अरेस्ट का हो गया है, जिसमें साइबर अपराधी लोगों को वीडियो कॉल करके खुद को पुलिस व कस्टम का आला अधिकारी बताते हैं और उन्हें छोड़ने के एवज में उनसे लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं। हैरत की बात है कि ये ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं जो न केवल उच्च स्तर की शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं बल्कि हाई-प्रोफाइल भी हैं। वहीं पुलिस कार्रवाई के नाम पर महीनों तक तो इनकी जांच करती है उसके बाद खानापूर्ति करने के लिए केस दर्ज कर लेती है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले आठ महीने में पुलिस ने करीब 10 लोगों की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस अब तक एक भी आरोपी का सुराग नहीं लगा पाई है।
स्मार्ट सिटी में डिजिटल अरेस्ट का पहला मामला 3 नवंबर 2023 को सामने आया था। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में अपना सहयोग दे चुकी 23 वर्षीय युवती को साइबर ठगों ने 17 दिनों तक घर में ही डिजिटल अरेस्ट करके रखा था। मामले में ढाई लाख ठग लिए थे। इस मामले में अभी तक पुलिस के हाथ खाली हैं।
वहीं 19 जनवरी 2024 को सेक्टर-15ए निवासी एक बुजुर्ग दंपति को घर में तीन दिन तक डिजिटली अरेस्ट कर साइबर ठगों ने करीब 46 लाख रुपये की ठगी की। 9 जून को साइबर थाना एनआइटी में चार्मवुड विलेज में रहने वाले बुजुर्ग ने दी शिकायत में बताया कि डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 12 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। हालांकि इनमें से दो मामलों को छोड़कर पुलिस ने किसी भी मामले को डिजिटली अरेस्ट की श्रेणी का नहीं माना है, जबकि सभी मामले लगभग एक जैसे थे।
वर्जन
इस वर्ष डिजिटल अरेस्ट संबंधी साइबर ठगी के दो मामले सामने आए थे। अन्य सभी को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। दोनों मामलों में पुलिस ने केस दर्ज कर करीब चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, उनसे पूछताछ जारी है। मुख्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। - अभिमन्यु गोयत, एसीपी एसीपी साइबर क्राइम