तीन महीने में 18 सर्जरी से गुजरने के बाद ट्रक से कुचले गए ग्वालियर के 12 वर्षीय बच्चे को सेक्टर 86 स्थित निजी अस्पताल ने नया जीवन दिया है। ग्वालियर निवासी जसविंदर सिंह ने बताया कि उनका 12 साल का बेटा मरीज हरमन सिंह उनके साथ अपने घर के पास स्थानीय बाजार जाते समय ट्रक की चपेट में आ गया था। जिससे उसके शरीर का निचला हिस्सा कुचल गया था। उसका दाहिनी ओर का पेट फट गया था और मांसपेशियां दिख रही थीं। हरमन की गंभीर हालत को देखते हुए ग्वालियर के अस्पतालों ने बच्चे को तुरंत अमृता अस्पताल ले जाने की सलाह दी और परिजन बिना समय गंवाए फरीदाबाद ले आए।
प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनिल मुरारका ने कहा कि वह बच्चे की हालत देखकर दंग रह गए थे। वह बेहद गंभीर स्थिति में था। पेट का पूरा निचला हिस्सा, दाहिनी जांघ और पीठ गंभीर चोटों से प्रभावित थे। लड़के का पेल्विस कुचल गया था, जिसमें कई फ्रैक्चर थे। एमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की प्राथमिकता मरीज को स्थिर करना था, जो एक बड़ी चुनौती थी।
अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद, हरमन को पहली सर्जरी के लिए ऑपरेटिंग थिएटर में ले जाया गया, जो 8 घंटे तक चली। उसके बाद अगले तीन महीनों में बच्चे की 18 अलग-अलग सर्जरी की गईं। अस्पताल आने के 110 दिनों के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गई। हालांकि उसकी जान बचा ली गई है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना है। उसे अपने निचले अंगों की पर्याप्त गतिशीलता के लिए गहन फिजियोथेरेपी और बाद में रिकंस्ट्रक्शन की आवश्यकता होगी और इसलिए उसे इमोशनल सपोर्ट की आवश्यकता होगी, क्योंकि वह इतनी कम उम्र में भारी यातना से गुजर चुका है।