खोरी गांव में चल रही तोड़फोड़ के बीच शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी खोरी गांव जा रहे थे, बीच में पुलिस गांव जाने से रोक लिया। पुलिस बल के साथ वह दोपहर करीब दो बजे जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचे।
यहां करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो लोगों को उजड़ने से बचा सकती है। सरकार को चाहिए कि वह वन विभाग की जमीन का अधिग्रहण कर खोरी गांव के लोगों को दे दे। इससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना भी नहीं होगी और लोगों के घर भी उजड़ने से बच जाएंगे।
उन्होंने कहा की सरकार लोगों को बसाने के लिए कारगर उपाय नहीं कर रही है। लोगों की अनदेखी करना सही बात नहीं है। जिला उपायुक्त ने उसे आश्वासन दिया कि उनकी बात को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा।
चढूनी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा से उनका निष्कासन खत्म हो गया है। वह जल्द ही दिल्ली में जंतर-मंतर पर हो रही किसान संसद में भाग लेंगे। किसान संसद शुरू होने के दौरान वे वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े अलग अलग संगठनों की विचाराधारा अलग हो सकती है, लेकिन आपस में किसी की नाराजगी नहीं है।
भाजपा नेताओं द्वारा उनके ऊपर किसान आंदोलन की आड़ में राजनीति करने का आरोप लगाए जाने की बात पर उन्होंने कहा कि राजनीति करना पाप नहीं। बीजेपी राजनीति करें तो पुष्य और हम करें तो पाप, यह कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा आंदोलन राजनीतिक आंदोलन नहीं है। वे अपने मिशन पंजाब वाले बयान पर अभी भी कायम हैं।
चढूनी के फरीदाबाद आने पर पुलिस बेहद सतर्क रही। करीब तीन बजे वे जिला उपायुक्त से मिलकर बाहर आए। इसके बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम उन्हें दिल्ली की सीमा में छोड़कर आ गई।