फरीदाबाद। एसआरएस ग्रुप में हुए घोटाले के मामले में वित्त मंत्रालय ने पांच बैंकों को पत्र लिखकर इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए हैं।
वित्त मंत्रालय ने यह भी लिखा है यदि जरूरत पड़े तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में भी मामला दर्ज करवाएं। हालांकि वित्त मंत्रालय के आदेश के करीब सवा माह बाद भी बैंकों ने सीबीआई में शिकायत नहीं दी है। सूचना के अधिकार के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जवाब दिया है कि मामले की अभी जांच चल रही है।
एसआरएस ग्रुप ने ग्रेटर फरीदाबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्टों पर कई बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण लिया था। करीब तीन साल पहले एसआरएस ग्रुप ने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में याचिका लगाई थी।
इस पर ट्रिब्यूनल ने एसआरएस ग्रुप पर इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (दिवालिया विभेदन पेशेवर) नियुक्ति कर दिया था। इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल की जांच में सामने आया कि एसआरएस लिमिटेड ने विभिन्न बैंकों से ऋण के रूप में करोड़ों रुपये लिए थे। एसआरएस ने ऋण नहीं चुकाया और बैंकों का करोड़ों रुपये हड़प लिए। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 628.31 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया 223.79 करोड़, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 125.24 करोड़, ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स 68.78 करोड़, सिंडिकेट बैंक 14.13 करोड़, एक्सिस बैंक के 54.90 करोड़ रुपये बकाया हैं। एसआरएस लिमिटेड ने अप्रैल 2016 से ऋण की किश्त चुकाना बंद कर दिया था। जनवरी 2019 ने इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल के समक्ष माना था कि एसआरएस ने बैंक के साथ धोखाधड़ी की है।
इस मामले में व्हिशल ब्लोवर मनोज अग्रवाल ने मार्च 2019 में वित्त मंत्रालय में शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की थी। मनोज अग्रवाल का कहना है कि करोड़ों रुपये डूब जाने के बाद भी बैंकों ने इसकी शिकायत कहीं नहीं की है। मनोज अग्रवाल की शिकायत पर वित्त मंत्रालय ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और सिंडिकेट बैंक को पत्र लिखकर इस मामले में सीबीआई में एफआईआर दर्ज करवाने को कहा है।
वित्त मंत्रालय की ओर से बैंकों को 15 अप्रैल 2019 को पत्र भेजा गया था। मंत्रालय ने पत्र में यह भी लिखा है कि जरूरत पड़े तो बैंक ईडी के पास भी जा सकते हैं। मनोज अग्रवाल ने सूचना के अधिकार के तहत लीड बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से उस पत्र व उनकी शिकायत के संबंध में जानकारी मांगी तो 22 मई को भेजे गए जवाब में बताया गया कि उनकी शिकायत बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी के पास भेज दी है और उस पर जांच चल रही है।