मांझे से हर साल हादसे होते हैं। बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है। 15 अगस्त आते-आते इसकी खपत में इजाफा होने लगता है और यह बहुत सारी दुर्घटनाओं का कारण बनता है। पक्षियों के साथ साथ आदमी भी इसकी चपेट में आकर जान गंवा बैठते हैं।
प्रतिबंध के बावजूद जिले में प्लास्टिक का मांझा खुलेआम बिक रहा है। पॉलीथिन से बनीं पतंगें भी जिले में खूब दिखाई दे रही हैं। हर साल जुलाई-अगस्त के महीने में चीनी मांझे से कई हादसे होते हैं। 15 अगस्त आते-आते इन मामलों में लगातार इजाफा होता जाता है। अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में भी चीनी मांझे से एक युवक की जान चली गई। जिले में भी एक व्यक्ति की गर्दन में चीनी मांझे से घाव आ गया था।
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चीनी मांझे की बिक्री को लेकर प्रशासन भी मुस्तैद दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि ओल्ड फरीदाबाद, एनआईटी-1, एनआईटी-2, एनआईटी-5 और बल्लभगढ़ सहित अन्य बाजारों में मांझे की खुलेआम बिक्री हो रही है। कुछ लोगों का शौक और प्रशासन की लापरवाही से पतंग और चाइनीज मांझा कातिल बनकर उड़ान भरते हैं।
पॉलीथिन की पतंगे भी अलग-अलग डिजाइन में बेची जा रही हैं। चाइनीज मांझे के कारण हर साल कई पक्षियों की मौत भी होती है। इसके बावजूद अभी तक नगर निगम की तरफ से ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जो चाइनीज मांझा बेच रहे हैं। इस मांझे को छोटे बच्चे, किशोर और युवा सबसे अधिक खरीदते हैं।