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बंदियों में जगी परिवार से मिलने की आस

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फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। कोरोना महामारी से जहां एक तरफ लोग जिंदगी और मौत के बीच के डर को महसूस करके घरों में छिपने लगे हैं, वहीं जेल में बंद बंदियों को कोरोना के कारण अपने परिवार से मिलने की आस जाग गई है। बंदियों को लगने लगा है कि पिछले वर्ष की भांति इस साल भी सरकार विशेष पैरोल की घोषणा कर देगी और अपने परिवार के साथ कुछ वक्त गुजार सकेंगे।
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बंदियों के परिजन व अधिवक्ताओं ने इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। साल 2020 में कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंकाओं के मद्देनजर नीमका के बंदियों को विशेष पैरोल पर भेजा गया था। इसके लिए जेल प्रशासन द्वारा बंदियों की अपराध के अनुसार सूची तैयार की गई थी। संक्रमण की आशंका के चलते सर्वोच्च न्यायालय ने इसके निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने निर्णय लिया कि जो बंदी पहले से ही पैरोल पर जेल से बाहर हैं, उनकी चार सप्ताह की विशेष पैरोल बढ़ाई जाएगी। जो कैदी एक पैरोल या एक फरलो को शांतिपूर्वक व्यतीत करके समय पर जेल में हाजिर हो गए, उन्हें भी छह सप्ताह की विशेष पैरोल दी गई थी।
कागजात किए जाने लगे तैयार
जेल सूत्रों के मुताबिक जिन कैदियों की आयु 65 वर्ष से अधिक है और वे एक से अधिक केस में संलिप्त नहीं हैं, ऐसे कैदी, जिनकी सजा सात वर्ष से अधिक नहीं है, उनका कोई अन्य केस न्यायालय में लंबित नहीं है, कोई जुर्माना भी बकाया नहीं है, उन्हें जेल में अच्छे आचरण के आधार पर पैरोल दी जा सकती है। ऐसे अपराधी जो अधिक मात्रा में मादक पदार्थ के केस, धारा 379 बी, पोक्सो एक्ट , दुष्कर्म या एसिड अटैक जैसे मामले में सजायाफ्ता हैं, उन्हें पैरोल नहीं मिल सकती। अधिवक्ता अनीस खान का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर कई बंदियों के पैरोल के कागजात तैयार करने शुरू कर दिए हैं। पिछले साल की तरह इस वर्ष भी शायद बंदियों को कुछ समय के लिए जेल से घर भेजा जाएगा। जेल अधीक्षक जयकिशन छिल्लर का कहना है कि उनके पास अभी सरकार की तरफ से ऐसे कोई निर्देश नहीं आए हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल कोरोना के मामले काफी ज्यादा हैं। उन्हें देखकर कोई निर्देश जारी होगा तो उसके हिसाब से व्यवस्था की जाएगी।
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