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अतिक्रमण : अंदर लोहा व्यापारी तो बाहर शोरूम संचालक बने जाम का कारण

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। शहर के बीचों-बीच स्थित नेहरू ग्राउंड जो कभी लोहा मंडी का हब कहा जाता था। प्रति माह 50,000 टन से अधिक लोहे और स्टील का व्यापार यहां से होता था। मंडी में लोहा व्यापारियों की मारामारी और जाम की स्थिति से निबटने के लिए सन् 2004 में मंडी को सेक्टर-59 में शिफ्ट कर दिया गया था। कुछ व्यापारी यहां से शिफ्ट हो गए, लेकिन अधिकतर व्यापारी आज भी यहां पर बने हुए हैं। इनकी दुकानों के आगे बड़े-बड़े ट्रक एवं लोहा-इस्पात पड़ा रहता है, इसके चलते मंडी में हर वक्त जाम लगा रहता है।
नेहरू ग्राउंड के अंदर लोहा व्यापारियों द्वारा किया गया अतिक्रमण और बाहर की तरफ बड़े-बड़े शोरूम खुले हुए हैंं। हालांकि इन शोरूम के आगे काफी जगह है और पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से इसे बसाया गया था। शोरूम वाले बाहर तक टेंट लगाकर अपना सामान रखकर अतिक्रमण कर देते हैं, जबकि मंडी के अंदर लोहा व्यापारी सड़कों पर ही लोहे के गाटर, सरिया व अन्य सामान पटक देते हैं। ऐसे में लोग अंदर जाने से कतराते हैं। दिवाली के मौके पर नेहरू ग्राउंड के बाहर खुले हुए शोरूम संचालक बड़े-बड़े ऑफर के बोर्ड एवं टेंट लगाकर लोगों को आकर्षित करने के लिए सड़कों तक आ जाते हैं। रही-सही कसर यहां आने वाले लोग अपनी गाड़ियां खड़ी कर पूरा कर देते हैं।
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नेहरू ग्राउंड से लोहा मंडी जब सेक्टर-59 में शिफ्ट कर दी गई है, तो सरकार को इसे खाली कराना चाहिए। आज भी बड़ी संख्या में लोहा व्यापारी यहां पर बैठे हुए है, जिसके चलते यह एक अच्छी मार्केट के रूप में विकसित नहीं हो सकी है।
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- आरती खुराना


सेक्टर-59 में महंगी दर पर प्लाट और मूलभूत सुविधाओं का अभाव के चलते व्यापारी आज भी यहां हैं। वहां करीब 600 प्लाट काटने के बावजूद यहां केवल सवा सौ दुकानदारों ने ही प्लाट लिए हैं। इसमें से भी मुश्किल से आधी दुकानें बनी हैं।
- अजय सैनी
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