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Faridabad News: बिजली चोरी के मामले में दायर अर्जी खारिज की

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अदालत ने कहा, केवल जेल में बंद होना किसी याचिका की पुनर्बहाली का स्वतः आधार नहीं बनता
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने बिजली चोरी के आकलन और कंपाउंडिंग नोटिस को चुनौती देने से जुड़े एक सिविल वाद में दायर बहाली अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल जेल में बंद होना किसी याचिका की पुनर्बहाली का स्वतः आधार नहीं बनता, खासकर तब जब वाद सिविल प्रकृति का हो और अधिवक्ता के माध्यम से पैरवी संभव हो।

मामले में याचिकाकर्ता ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा जारी आकलन (एलएल-1) और कंपाउंडिंग नोटिस को निरस्त घोषित करने की मांग करते हुए वाद दायर किया था। यह वाद चार दिसंबर 2018 को गैरहाजिरी के कारण खारिज हो गया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अर्जी लगाकर कहा कि वह बीस दिसंबर 2017 से एक आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत में था और 21 अक्तूबर 2021 को जमानत पर रिहा हुआ। जेल में होने के कारण वह अदालत में पेश नहीं हो सका, इसलिए उसका वाद बहाल किया जाए।
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अदालत ने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद माना कि याचिकाकर्ता वास्तव में उक्त अवधि में जेल में था, लेकिन यह भी पाया कि जिस दिन वाद खारिज हुआ, उस दिन उसके अधिवक्ता की अनुपस्थिति का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। अदालत ने कहा कि सिविल मामलों में वादी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं होती और अधिवक्ता के माध्यम से कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती है। यदि वादी हिरासत में था तो उसके वकील का दायित्व था कि वह अदालत को इसकी जानकारी देता या स्थगन का अनुरोध करता। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि बिजली चोरी से संबंधित मामलों में सिविल अदालत के अधिकार क्षेत्र पर पूर्व में उच्च न्यायालय द्वारा भी स्पष्ट व्याख्या की जा चुकी है। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि बहाली के लिए पर्याप्त कारण सिद्ध नहीं हुआ है। परिणामस्वरूप, बहाली की अर्जी खारिज करते हुए रिकॉर्ड को अभिलेखागार भेजने के निर्देश दिए गए।
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