फरीदाबाद। जिले में नशे के किंग के नाम से बदनाम बिजेंदर को दो दिन तक रिमांड में रखने के बाद भी पुलिस उससे दो ग्राम गांजा तक बरामद नहीं पाई। क्राइम ब्रांच ने लाला की गिरफ्तारी के लिए जो कहानी बताई उसकी स्क्रिप्ट भी गले उतरती नजर नहीं आ रही। क्राइम ब्रांच के मुताबिक लाला अपनी पत्नी से मिलने सेक्टर-12 में आया था। पुलिस को इसकी भनक लग गई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
सेक्टर-12 का इलाका बेहद ही सुनसान है। यहां किसी तरह की कोई सीसीटीवी या अन्य व्यक्ति के मौजूदगी की गुंजाइश न के बराबर रहती है। लाला पर पुलिस ने पचास हजार का इनाम घोषित कर रखा था। इतने बड़े इनामी के पास पुलिस को ना तो कोई हथियार मिला और ना ही उसके पास कोई वाहन था। मोस्टवांटेड की लिस्ट में शामिल आरोपी पैदल ही खुले आम घूम रहा था। इस बात को लेकर अंदर खाने पुलिस विभाग में भी चर्चा गरम है। 17 मई को ओल्ड फरीदाबाद निवासी एमबीए के छात्र कवीश की ड्रग्स की ओवरडोज के कारण मौत हो गई थी। क्राइम ब्रांच का दावा है कि कवीश तक ड्रग्स लाला के जरिये पहुंचा था। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने लाला को गिरफ्तार किया है।
कविश मामले से कैसे जोड़ पाएगी पुलिस
पुलिस बीते कई महीनो से लाला को जिले का सबसे बड़ा ड्रग माफिया बताती आ रही है। इसी के कारण उस पर इनाम भी घोषित हुआ। कवीश की मौत के बाद क्राइम ब्रांच ने दावा किया था कि वह जिले में नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म कर देगी। इसके लिए सभी की निगाहें लाला की गिरफ्तारी पर टिकी हुई थी। पुलिस ने तरुण व दीपक नाम के युवकों को नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया गया। इसके बाद में पलवल में भी छापा मारकर दो भाइयों को नशीले इंजेक्शन के साथ पकड़ा। पुलिस इस बात को मानती है कि लाला ही नशीले पदार्थों के नेटवर्क की मुख्य कड़ी है। इस सबके बावजूद पुलिस दो दिन के रिमांड में उससे कुछ भी बरामद नहीं पाई। ऐसे में पुलिस अदालत में ये कैसे साबित करेगी कि कविश की मौत का कारण बना इंजेक्शन लाला के पास से ही आया था।
नशीले पदार्थ के साथ पकड़ने में क्या हो सकती थी सजा
वरिष्ठ अधिवक्ता अनवर खान ने बताया कि एनडीपीएस एक्ट में अलग अलग मामलों में अलग अलग सजा का प्रावधान है। एक किलो से कम मात्रा में गांजा बरामद होने पर अदालत जुर्माना या एक साल की सजा सुना सकती है। वह चाहे तो दोनों भी कर सकती है। एक किलो से ज्यादामात्रा पर दस साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। बीस किलो तक गांजा मिलने पर उसे व्यापारिक मान लिया जाता है। ऐसे में आरोपी को बीस साल तक की सजा सुनाई जा सकती है। हेरोइन को पांच ग्राम में भी एक साल तक की सजा के लायक मन जाता है। ढाई सौ ग्राम की मात्रा को व्यापारिक मानते हुए बीस साल तक सजा हो सकती है। इसी तरह कोकीन को 100 ग्राम में भी व्यापारिक मान लिया जाता है। ऐसे में इतने बड़े ड्रग डीलर के पास कुछ भी बरामद नहीं होना चर्चा का विषय बना हुआ है। सोमवार को लाला को अदालत में पेश किया जाएगा।