फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में कॉर्क से बने सामानों को काफी लोग पसंद कर रहे हैं। स्टॉल 367 पर दिल्ली के सौरभ कादियान के उत्पाद वातावरण अनुकूल है। स्टॉल पर बटूवा, बेल्ट, प्लेट, टेबल मैट, गमले तथा कंप्यूटर के माउस पैड आदि कई ऐसे उत्पाद है जो दिखते चमड़े जैसे हैं लेकिन वे कॉर्क से बने हुए हैं।
कॉर्क के छाल उतार कर उत्पाद बनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि उत्पाद पूरी तरह से शाकाहारी ब्रांड है। यह जानवरों के चमड़े और प्लास्टिक के लिए स्थायी विकल्प के तौर पर मौजूद हैं। सौरभ ने बताया कि कॉर्क से बने उत्पाद से पर्यावरण पर भी किसी प्रकार का गलत प्रभाव नहीं पड़ता। कॉर्क के पेड़ पुर्तगाल और स्पेन के आसपास होते हैं। इसके लिए समुद्र के नजदीक कम गर्मी का तापमान होना चाहिए। साथ ही वातावरण में आद्रता होनी चाहिए। इसके उत्पाद बनाने के लिए पेड़ को काटने की जरूरत नहीं होती बल्कि उसकी छाल उतारी जाती है। छाल उतारने के बाद वह और अधिक मात्रा में कार्बन ऑक्साइड को अपने अंदर सोखता है।
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200 डिग्री सेल्सियस तक हीट को बर्दाश्त करता है कॉर्क
कॉर्क एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामान है। इसे हवाई जहाज तथा स्पेस क्राफ्ट में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह वजन में बहुत ही हल्का होता है। 200 डिग्री सेल्सियस तक हीट को बर्दाश्त कर सकता है। पहले दवाइयों की शीशी पर भी कॉर्क के ही ढक्कन लगे होते थे।
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बच्चों की पहली पसंद बना ब्रेक डांस झूला
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में छोटे बच्चों के लिए मनोरंजन की कोई कमी नहीं है। मेला परिसर में एक दर्जन से ज्यादा किस्म के झूले बच्चों के लिए मनोरंजन का साधन बने हुए हैं। मेले के एक कोने में बच्चों के लिए झूलों की विशेष व्यवस्था की गई है, जहां पर सभी प्रकार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस सुरक्षा कर्मियों की जगह जगह तैनाती की गई है। मेले में आने वाले बच्चों में सबसे अधिक पसंद ब्रेक डांस वाला झूला है। बच्चे यहां आते ही इस झूले की ओर आकर्षित होते हैं। झूलों में वाटर बोट, मिक्की माऊस, ड्रेगन ट्रेन व चकरी कार इत्यादि शामिल है।
पांडा व हाथी की बिक्री सबसे अधिक
फरीदाबाद। रंग बिरंगे खिलौनों से सजे स्टॉल बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। स्टॉल पर 70 से भी अधिक खिलौने बिक्री के लिए लगाए गए हैं, जिनमें पांडा और हाथी की बिक्री सबसे अधिक हो रही है। स्टॉल नम्बर-384 पर रंग-बिरंगे कपड़ों से बने खिलौने बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। स्टॉल की संचालक सावित्री देवी ने बताया कि ग्राहकों को पांडा और हाथी सबसे अधिक लुभा रहे हैं। मखमली कपड़े से बना कुशन की भी अच्छी बिक्री हो रही है। नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के माध्यम से 50 प्रतिशत अनुदान पर लोन लेकर 6 साल पहले शुरू किया था। 100 से लेकर 2 हजार रुपये तक के खिलौने हैं।