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Faridabad News: महापर्व छठ के लिए घाटों की साफ-सफाई का कार्य शुरू

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। पूर्वांचल समाज के लोग सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की तैयारियों में जुट गए हैं। कुछ संस्थाओं ने घाट की साफ-सफाई के साथ-साथ रंग रोगन का काम शुरू कर दिया है। कुछ संस्थाएं एक-दो दिन पहले ही छठ घाटों की सफाई करवाएंगी। श्रद्धालुओं की सहूलियत और संख्या को देखते हुए प्रबंधकों की ओर घाटों पर इंतजाम किए जा रहे हैं।
शहर में लगभग सौ स्थानों पर छठ पूजा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिले में लगभग सात से आठ लाख लोग इस पूजा में हिस्सा लेते हैं। छठ की तैयारियों को लेकर इस बार स्वयंसेवी पूर्वांचली संगठनों ने नए घाटों के निर्माण कार्य के साथ-साथ पुराने घाटों की साफ-सफाई का काम शुरू भी कर दिया है। कुछ एक घाट पूरी तरह सजकर तैयार हो गए हैं। जहां दीपावली पर्व भी धूमधाम से मनाया गया। एनआईटी नंबर तीन के नजदीक पूर्वी छठ समिति ने घाटों की सफाई के साथ-रंगाई का काम भी पूरा कर लिया गया है। समिति के पदाधिकारी धर्मराम नाथ ने बताया कि समिति की ओर से इस बार श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए नए घाट बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। हर बार इस घाट पर करीब आठ से दस हजार लोग पूजा अर्चना करते हैं। एनआईटी नंबर दो-स्थित भोजपुरी अवधी समाज की ओर से भी छठ पूजा को लेकर घाट की साफ-सफाई का काम शुरू किया जा चुका है। हर वर्ष इस घाट पर लगभग दस से बारह हजार श्रद्धालु पूजा के लिए आते हैं। बड़खल, जवाहर कालोनी, राजीव कालोनी, खेड़ी पुल, सेक्टर-3 आगरा नहर के अलावा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में छठ पूजा आयोजित की जाएगी।
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श्रद्धालुओं में इस पूजा को लेकर रहता है विशेष उत्साह
जिले के विभिन्न इलाकाें में पूर्वी उतर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छतीसगढ़ आदि प्रदेशों के करीब सात से आठ लाख लोग रहते हैं। इन लोगो में छठ पूजा को लेकर खासा उत्साह रहता है। छठ पूजा आयोजक समितियों की ओर से इन पूजा स्थलों पर विशेष मेलों का भी आयोजन किया जाता है। इन स्थालों पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा बच्चों के लिए भी रोचक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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17 नवंबर को मनाया जाएगा आस्था का पर्व
लोक आस्था और सूर्याेपासना के महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान 17 नवंबर को नहाय खाये के साथ शुरू होगा। इस पर्व पर श्रद्धालु स्वच्छता और शुद्धता बरतते हुए स्नान के साथ चने की दाल, कद्दू की सब्जी आदि ग्रहण करते हैं। अगले दिन खरना पर्व के साथ व्रतधारी श्रद्धालुओं का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होगा। 19 नवंबर को श्रद्धालु सूर्य देवता को पहला अर्घ्य देंगे। 20 नवंबर को उगते सूर्य को ऊर्षा अर्घ्य देकर व्रतधारी श्रद्धालु अपना व्रत खोलेंगे।
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