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Faridabad News: बच्चे ने दोस्त को मारा चाकू, पेट में 4 बार किए वार

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पतंग काटने को लेकर हुआ था विवाद, एक ही स्कूल में पढ़ते हैं दोनों बच्चे
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। मवई गांव की करुणा नगर कॉलोनी में पतंग काटने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खून-खराबे में तब्दील हो गया। चौथी कक्षा के छात्र ने पड़ोस में रहने वाले छठी कक्षा के छात्र पर सब्जी काटने वाले चाकू से ताबड़तोड़ चार वार किए।
हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार, यह घटना सोमवार शाम 7 बजे के बाद की है। दोनों बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। घायल बच्चा छठीं कक्षा में पढ़ता है और जिस छात्र ने हमला किया है, वह बच्चा चौथी कक्षा का छात्र है। सोमवार शाम को दोनों बच्चे घर के पास पतंग उड़ा रहे थे। इसी बीच एक बच्चे ने दूसरे की पतंग काट दी। इसके बाद दोनों की कहासुनी हो गई, थोड़ी देर बाद कहासुनी हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि पतंग कटने से आग बबूला हुआ बच्चा अपने घर गया और वहां से सब्जी काटने वाला चाकू उठा लाया। इसके बाद उसने पड़ोसी बच्चे पर हमला कर दिया। उसने चाकू से पड़ोसी बच्चे के पेट में चार वार कर दिए। इससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। बच्चे की चीख सुनकर आस-पड़ोस के लोग इकट्ठा हो गए और बच्चे को अस्पताल पहुंचाया।
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घायल बच्चे के परिजनों का आरोप है कि पड़ोसी बच्चे की ओर से उन्हें पहले भी धमकियां दी जा चुकी हैं। उनका आरोप है कि चाकू मारने वाले बच्चे के दो बड़े भाई भी पड़ोस में लोगों को धमकाते हैं और हाथ में चाकू लेकर घूमते हैं। पुलिस ने इन आरोपों को लेकर भी जांच शुरू कर दी है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के परिजनों से पूछताछ कर मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार, अस्पताल में भर्ती घायल बच्चे की हालत को देखते हुए डॉक्टर ने उसे फिलहाल बयान देने के लिए अनफिट घोषित किया है। बच्चे के बयान के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। खेड़ी थाना के एसएचओ इंस्पेक्टर राकेश सिंह ने बताया कि बच्चे का ऑपरेशन किया जा चुका है। चाकू मारने वाले बच्चे के दोनों बड़े भाईयों का फिलहाल आपराधिक रिकॉर्ड का पता नहीं चला है। यदि गतिविधि संदिग्ध होगी तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दोनों बच्चे नाबालिग हैं। पुलिस नियमानुसार कार्रवाई कर रही है।
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वर्जन
आजकल बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं, जिससे बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ गया है। आजकल परिवार अपने बच्चों को सब चीजें देने का प्रयास करते हैं। इससे जब बाहर कोई बच्चा उनसे आगे निकलता है या जीत जाता है तो सहन नहीं होता। इससे बच्चा आक्रामक हो जाता है। -डॉ. मीनाक्षी मनचंदा, मनोचिकित्सक
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