पश्चिम बंगाल व असम के सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म व अन्य सामान सप्लाई करने का टेंडर दिलाने का दिया झांसा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। पश्चिम बंगाल व असम के सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म, बैग व अन्य सामान सप्लाई का टेंडर दिलाने का झांसा देकर फरीदाबाद की कंपनी से 6.18 करोड़ रुपये ठग लिए गए। कंपनी निदेशक का आरोप है कि साजिश के तहत फर्जी लेटर ऑफ इंटेंट बनाकर उन्हें भेजे गए। आरोपियों ने खुद को आईएएस अधिकारी व असम के क्षेत्रीय प्रशासनिक विभाग बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद के अधिकारी बनकर ये ठगी की। रुपये लेने के महीनों बाद तक भी आरोपी झांसा देते रहे लेकिन टेंडर नहीं दिलाए।
पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि मामले में शुरुआती जांच के बाद अब सराय ख्वाजा थाने में साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर ठगी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। केस की जांच अब आर्थिक अपराध शाखा की टीम करेगी।
ठगी को लेकर पुलिस को ये शिकायत सेक्टर-38 स्थित मैसर्स कैम्परी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुनील मेहरा ने दी। ठगी का आरोप 10 लोगों व कंपनियों पर लगाया गया है। आरोप है कि सितंबर 2023 में इनकी कंपनी से गारमेंट निर्माता व खरीददार एजेंट के बी कुमार ने संपर्क किया और कुंवर अभिलेष सिंह को आईएएस अधिकारी बताकर मिलवाया। सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म सप्लाई करने का टेंडर दिलवाने का दावा किया गया। इसके लिए कुल 1 करोड़ 87 लाख रुपये अक्टूबर से दिसंबर 2023 के दौरान ट्रांसफर किए गए। लेकिन टेंडर दिलाने को कहा गया तो 11 जनवरी 2024 को 1 करोड़ रुपये वापस कर दिए गए।
बाद में पश्चिम बंगाल और असम के सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म, बैग, जूते सप्लाई कराने का टेंडर दिलाने का दावा किया गया। दो महीने बाद आरोपियों ने के शैलेंद्र प्रताप सिंह से मिलवाया। बताया गया कि ये बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल, असम में मंत्री व काउंसिल सेक्रेटरी है। आरोप है कि के शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूनिफॉर्म का ऑर्डर बाद में लेंगे, अभी डिजिटल व्हाइट बोर्ड व अन्य सामान चाहिये। ये ऑर्डर कई सौ करोड़ के होंगे। ये दिलाने के नाम पर दिसंबर 2023 से अप्रैल 2024 के दौरान 5.51 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। लेकिन टेंडर नहीं दिलाए। मामले में अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।