परियोजना के साथ औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग सीवर नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा, 312 करोड़ रुपये खर्च होंगे
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी के निस्तारण की समस्या को दूर करने के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) ने परियोजना तैयार की है। परियोजना के तहत प्रतापगढ़ गांव में 50 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) तैयार किया जाएगा। इसमें औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को आधुनिक तकनीक से उपचारित कर टर्शियरी स्तर तक शुद्ध किया जाएगा। परियोजना के साथ औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग सीवर नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 312 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा।
कई चरणों में गंदा पानी होगा शोधित
परियोजना के तहत सेक्टर-24 और सेक्टर-25 में दो इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस) बनाए जाएंगे। सेक्टर-24 में 900 एमएम व्यास की ग्रेविटी सीवर लाइन प्रस्तावित है। वहीं सेक्टर-25 के आईपीएस से गुरुग्राम नहर के साथ समर्पित सीवर लाइन बिछाकर औद्योगिक अपशिष्ट को प्रतापगढ़ स्थित सीईटीपी तक पहुंचाया जाएगा। निर्माण के दौरान रास्ते में आने वाली भूमिगत सेवाओं और बिजली के खंभों को भी शिफ्ट और दोबारा स्थापित किया जाएगा। परियोजना में तीन महीने का ट्रायल रन भी शामिल है। प्रस्तावित प्लांट पूरी तरह स्वचालित होगा और इसमें फिजिको-केमिकल और जैविक प्रक्रिया यानी एक्सटेंडेड एरेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। प्लांट में कच्चे औद्योगिक अपशिष्ट को प्राप्त करने के लिए मेन पंपिंग स्टेशन, स्क्रीनिंग चैंबर, ऑयल एवं ग्रीस ट्रैप, ग्रिट चैंबर, इक्वलाइजेशन टैंक, एरेशन टैंक और सेकेंडरी क्लैरिफायर जैसी व्यवस्थाएं होंगी। इसके बाद रैपिड ग्रेविटी फिल्टर, फिल्टर्ड वाटर स्टोरेज, क्लोरीनेशन और स्लज ट्रीटमेंट की प्रक्रिया से पानी का उपचार किया जाएगा।
प्लांट में ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी होगी। उपचारित पानी और प्लांट की प्रक्रिया से जुड़े डेटा को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की वेबसाइट पर अपडेट किया जाएगा। साथ ही उपचारित पानी को निर्धारित निस्तारण स्थल तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी। परियोजना में प्लांट के निर्माण के साथ 10 साल के संचालन एवं रखरखाव का प्रावधान भी है। इस दौरान सीईटीपी और दोनों आईपीएस का संचालन, कर्मचारियों की व्यवस्था, रसायनों का इस्तेमाल, मरम्मत, लुब्रिकेंट, स्लज निस्तारण और समर्पित सीवर लाइनों की डी-सिल्टिंग का काम किया जाएगा।