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एसआरएस ग्रुप के ठिकानों पर सीबीआई ने मारे छापे, निदेशकों के घर और कार्यालयों पर दबिश

Fri, 17 Jul 2020 05:51 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
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सीबीआई रेड
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विभिन्न बैंकों से करीब 1100 करोड़ से अधिक के गबन के आरोप में बृहस्पतिवार को सीबीआई ने एसआरएस ग्रुप के ठिकानों पर छापे मारे। इस दौरान निदेशकों के घर और कार्यालयों पर दबिश देकर दस्तावेज खंगाले गए।

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बृहस्पतिवार सुबह 8.30 बजे पहुंची सीबीआई टीम ने सेक्टर-12 स्थित एसआरएस मॉल, सेक्टर-31 स्थित एसआरएस टॉवर के अलावा सेक्टर-9, सेक्टर-11, सेक्टर-14 और सेक्टर-65 में दबिश दी। इन जगहों पर एसआरएस ग्रुप के निदेशकों के परिजन रह रहे हैं।

टीम ने दिनभर यहां दस्तावेज खंगाले और पूछताछ की। सुबह 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई देर शाम तक जारी थी। सीबीआई ने शहर में 10 से ज्यादा ठिकानों पर कार्रवाई की। पिछले साल एसआरएस ग्रुप में हुए घोटाले के मामले में वित्त मंत्रालय ने पांच बैंकों को पत्र लिखकर उसकी शिकायत सीबीआई में कर मामला दर्ज करवाने के आदेश भी दिए थे।
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यह है मामला
एसआरएस ग्रुप ने ग्रेटर फरीदाबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्टों पर कई बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण लिया था, जिन्हें ग्रुप के निदेशकों ने अपनी ही बेनामी कंपनी में ट्रांसफर कर दिया था। करीब चार साल पहले एसआरएस ग्रुप ने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में याचिका लगाई थी।

इस पर ट्रिब्यूनल ने एसआरएस ग्रुप पर इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (दिवालिया विभेदन पेशेवर) नियुक्ति कर दिया था। इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल की जांच में सामने आया था कि एसआरएस लिमिटेड ने विभिन्न बैंकों से ऋण के रूप में करोड़ों रुपये लिए थे। एसआरएस ने ऋण नहीं चुकाया और बैंकों के करोड़ों रुपये हड़प लिए।

दो साल से जेल में हैं अनिल जिंदल और अन्य निदेशक
करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित पांच निदेशकों विनोद गर्ग मामा, नानक तायल, बिशन बंसल, देवेंद्र अधाना को 5 अप्रैल 2018 को फरीदाबाद पुलिस ने दिल्ली के एक होटल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद कई अन्य लोग भी जेल जा चुके हैं। पिछले दो साल से सभी आरोपी नीमका स्थित फरीदाबाद की जिला जेल में बंद हैं।

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पुराने पते के कारण भटकती रही सीबीआई टीम

बैंक धोखाधड़ी के मामले में बृहस्पतिवार सुबह एसआरएस ग्रप के निदेशकों के ठिकाने पर पहुंची सीबीआई टीम को पुराने पते होने के कारण परेशान होकर भटकना पड़ा। बाद में सही पता मिलने पर ही टीम उनके ठिकाने पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की। 

सूत्रों के अनुसार सीबीआई की टीम बृहस्पतिवार सुबह कार्रवाई के लिए एसआरएस ग्रुप के निदेशक नानकचंद तायल के सेक्टर-9 स्थित पुराने मकान पर पहुंची, मगर वह मकान बंद मिला। मकान पर बैंक लोन होने के कारण इसे बैंक पहले ही नीलाम कर चुका है। इस पर सीबीआई टीम ने नानकचंद तायल के परिजनों का नया पता ढूूंढ और फिर वहां पहुंच अपनी कार्रवाई की।

नानक तायल का परिवार इस समय सेक्टर-11 में रह रहा है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम के तीन अधिकारियों के साथ दो अधिकारी बैंकिंग क्षेत्र से भी जुड़े हुए थे, उन्होंने भी सीबीआई टीम के साथ ही दस्तावेज खंगाले।

अप्रैल 2016 से चुकानी बंद की गई किश्त
एसआरएस लिमिटेड ने अप्रैल 2016 से बैंकों के ऋण की किश्त चुकाना बंद कर खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में याचिका लगा दी थी। बैंकों के साथ गबन के मामले में व्हिशल ब्लोवर मनोज अग्रवाल ने मार्च 2019 में वित्त मंत्रालय में शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की थी। मनोज अग्रवाल की शिकायत पर वित्त मंत्रालय ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और सिंडिकेट बैंक को पत्र लिखकर इस मामले में सीबीआई में एफआईआर दर्ज करवाने को कहा था।

किस बैंक की है कितनी रकम:
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 628.31 करोड़
- बैंक ऑफ इंडिया 223.79 करोड़
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 125.24 करोड़
- ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स 68.78 करोड़
- सिंडिकेट बैंक 14.13 करोड़
- एक्सिस बैंक के 54.90 करोड़ रुपये एसआरएस ग्रुप पर बकाया हैं।

ईडी भी कर चुकी है संपत्ति अटैच 
बैंकों का करीब 1100 करोड़ रुपये का ऋण नहीं चुकाने पर इस साल जनवरी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी एसआरएस ग्रुप से जुड़ी करीब 2510 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर ली थी। इनमें जमीन, रियल एस्टेट परियोजनाएं, वाणिज्यिक परियोजनाएं, आवासीय मकान, एक स्कूल, सिनेमा हॉल, बैंक खातों में जमा राशि और सावधि जमा राशि (फिक्सड डिपॉजिट) को धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (पीएमएलए) के तहत अटैच किया गया था।
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