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Faridabad News: ट्रेनों की भीड़ ने बसों को बनाया ‘कमाई एक्सप्रेस’

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बिहार और पूर्वी यूपी जाने वाले लोगों को ट्रेनों में नहीं मिल रहीं सीटें, बस संचालक वसूल रहे ज्यादा किराया
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निधि कुशवाहा

फरीदाबाद। गर्मी की छुट्टियों और शादी के सीजन के चलते बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेनों में सीटें फुल होने और लंबी वेटिंग के कारण लोग मजबूरी में निजी बसों का सहारा ले रहे हैं। इसका फायदा उठाकर निजी बस संचालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं।


फरीदाबाद में बड़ी संख्या में बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी परिवार रहते हैं। हर साल मई-जून की छुट्टियों के दौरान लोग अपने गांव जाने के लिए यात्रा करते हैं लेकिन ओल्ड फरीदाबाद से बिहार के लिए सीधी ट्रेन नहीं होने के कारण यात्रियों को पहले दिल्ली के रेलवे स्टेशनों तक पहुंचना पड़ता है। वहां से भी अधिकांश ट्रेनों में टिकट पहले से बुक होने के चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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फरीदाबाद से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने के लिए यात्रियों को पहले नई दिल्ली, आनंद विहार और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन तक जाना पड़ रहा है। गर्मी, भीड़ और अतिरिक्त खर्च के बीच परिवार के साथ सफर करना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।


ट्रेनों में 250 तक पहुंची वेटिंग



यात्रियों का कहना है कि बिहार जाने वाली कई ट्रेनों में वेटिंग 200 से 250 तक पहुंच चुकी है। तत्काल टिकट मिलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में परिवार के साथ सफर करने वाले लोग निजी बसों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
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बिना रसीद अधिक पैसे लिए जा रहे
ट्रेन में सीट नहीं मिलने का फायदा निजी बस संचालक उठा रहे हैं। सामान्य दिनों में बिहार के विभिन्न शहरों के लिए 1200 से 1500 रुपये तक लिया जाने वाला किराया अब 2500 से 3500 रुपये तक वसूला जा रहा है। यात्रियों का आरोप है कि बिना रसीद अधिक पैसे लिए जा रहे हैं और बसों में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाई जा रही हैं।




प्रतिक्रिया

पटना जाने के लिए ट्रेन में टिकट नहीं मिला। मजबूरी में निजी बस से जाना पड़ रहा है, जहां दोगुना किराया देना पड़ रहा है।

- मोहाल झा, यात्री



परिवार के पांच लोगों के साथ गांव जाना है। ट्रेन की वेटिंग बहुत ज्यादा है, इसलिए अब बस ही हमारा सहारा बचा है।

- कमलजीत, यात्री



छोटे बच्चों के साथ पहले दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचना पड़ता है, फिर वहां घंटों इंतजार करना पड़ता है। सीधी ट्रेन होती तो राहत मिलती।

- पिंटू सिन्हा, यात्री



हर साल छुट्टियों में यही परेशानी होती है, लेकिन अब तक अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था नहीं की गई। रेलवे को इंतजाम करने चाहिए।

- ऋषि, यात्री
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