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अमर उजाला पड़ताल : गर्मी-बारिश के बाद अब ठंड में ठिठुर रहे खोरी विस्थापित 300 परिवार, बोले-घरों को तोड़ दिया, फ्लैट रहने लायक नहीं

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फरीदाबाद के खोरी गांव में नगर निगम ने की तोड़फोड़। फाइल फोटो - फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद (दुर्गेश झा)। अरावली वन क्षेत्र स्थित खोरी के विस्थापितों का एक-एक दिन पहाड़ जैसा गुजर रहा है। उनका कहना है कि पहले चिलचिलाती धूप में तपे, फिर बारिश ने उन्हें भिगोया। अब खुले आसमान में ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं। ऐसे में उनकी परेशानी बढ़ रही है। निगम द्वारा दिए जाने वाले फ्लैट्स रहने लायक नहीं है, जाएं तो कहां?
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खोरी में अभी भी करीब 300 परिवार झुग्गी डालकर या खुले आसमान में मलबे पर रह रहे हैं। डूबती आस को परवान देने के लिए कई अदालत का भी चक्कर काट रहे हैं। लगातार सरकार, निगम अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। इन विस्थापितों का कहना है कि मानवता के नाते उनकी मदद की जाए। खोरी में की गई तोड़फोड़ के बाद से कइयों की नौकरी चली गई है। कइयों को मिल नहीं रही है। ऐसे में उन पर दुखों का पहाड़ टूटा है। उन्होंने बताया कि वे लोग सभी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। पीने एवं जरूरी कार्यों के लिए पानी काफी दूर से लाना पड़ रहा है। बिजली नहीं होने से अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। बावजूद इसके वो लोग यहां से नहीं जाएंगे क्योंकि निगम द्वारा दिए जाने वाले फ्लैट्स रहने लायक नहीं है।
खोरी गांव के विस्थापितों को डबुुआ कॉलोनी एवं बापूनगर के ईडब्ल्यूएस फ्लैट दिए जाने हैं। इसके लिए 29 नवंबर को पात्रों की सूची जारी कर दो दिसंबर को ड्रॉ होना था लेकिन दोनों कार्य तय वक्त पर नहीं हो सके। इससे पीड़ित परेशान हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जून में खोरी गांव में नगर निगम अवैैध निर्माणों पर कार्रवाई की थी। इस दौरान करीब 10 हजार मकानों को तोड़ दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव के विस्थापितों को फ्लैट देने को कहा था। जिस पर निगम डबुआ कॉलोनी व बापूनगर में बने ईडब्ल्यूएस फ्लैट देगा। निगम को ऑनलाइन व कार्यालय में करीब करीब 7000 आवेदन मिले हैं। पहले निगम की योजना थी कि दो दिसंबर को पात्रों का ड्रॉ करा दिया जाए। जिसमें उनके फ्लैट के नंबर की जानकारी दी जाती। वहीं, 15 दिसंबर तक अलॉटमेंट लेटर जारी किया जाना था। 30 अप्रैल तक पात्रों को फ्लैट देने की योजना है। पर विस्थापितों में से किसे फ्लैट मिलेगा, इस पर संशय बना हुआ है।
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