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Faridabad News: 6 साल बाद मां को मिला उनका लाल, सीडब्ल्यूसी की टीम ने तिगांव से किया रेस्क्यू

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लॉकडाउन के दौरान हो गया था लापता, बच्चे से आरोपी करवा रहे थे बाल मजदूरी
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। नेहरू कॉलोनी नंबर-3 से लॉकडाउन के दौरान लापता हुआ एक बच्चा करीब छह साल बाद तिगांव क्षेत्र के ढकोला गांव से रेस्क्यू किया गया है। आरोप है कि इस दौरान बच्चे से जबरन बाल मजदूरी करवाई जा रही थी। बच्चे को डरा धमकाकर आरोपियों ने अपने पास रखा हुआ था। मामले की जानकारी मिलने के बाद बाल संरक्षण टीम ने बच्चे को रेस्क्यू कर उसके परिजनों को सौंप दिया है।

इसके साथ ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, अजय नाम का बच्चा लॉकडाउन के समय करीब 8-9 वर्ष का था। वह अपने दोस्तों के साथ नेहरू कॉलोनी नंबर-4 इलाके की ओर खेलने गया था, जहां वह उनसे बिछड़ गया और रास्ता भटक गया। इसी दौरान बाइक सवार दो युवक उसे घर छोड़ने का झांसा देकर अपने साथ ले गए और तिगांव के ढकोला गांव में छोड़ दिया।
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आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने अजय को अपने पास रख लिया और उससे वर्षों तक डेरी और खेतों में काम करवाया। मामले का खुलासा तब हुआ जब गांव निवासी सतीश रावत ने एक घर से बच्चे के रोने-चिल्लाने की आवाज सुनी। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने एक व्यक्ति को बच्चे की पिटाई करते देखा। पूछताछ करने पर आरोपी ने उन्हें वहां से जाने को कहा, जिससे उन्हें शक हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को सूचना दी।

सीडब्ल्यूसी के चेयरपर्सन संतोष वत्स ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को रेस्क्यू किया गया। काउंसलिंग के दौरान बच्चे ने लंबे समय से जबरन बाल मजदूरी कराए जाने की बात बताई। इसके बाद पूरी रिपोर्ट तैयार कर बच्चे को उसके परिवार के हवाले कर दिया गया।

सीडब्ल्यूसी ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तिगांव थाने में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। साथ ही लेबर डिपार्टमेंट को भी पत्र भेजा गया है, ताकि बच्चे से करवाई गई बाल मजदूरी के आधार पर उसे मुआवजा दिलाया जा सके। पुलिस कमिश्नर, एसीपी और डीसीपी को भी मामले में जल्द कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।
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वहीं, अजय की मां सुशीला ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उनका बेटा अचानक लापता हो गया था। उन्होंने काफी तलाश की और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनके पति नहीं हैं और अजय उनका इकलौता बेटा है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की रहने वाली सुशीला फरीदाबाद में मजदूरी कर जीवन यापन करती हैं। बेटे के छह साल बाद मिलने पर उन्होंने खुशी जताई, साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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