फरीदाबाद (अवध किशोर श्रीवास्तव)। प्रदेश सरकार ने योग को बढ़ावा देने के करीब तीन वर्ष पहले 26 योग शालाएं शुरू की थी। प्रत्येक योगशाला के निर्माण पर करीब 30 लाख रुपये खर्च हुए थे। फंड के अभाव में अब योगशाला में एक भी वालंटियर तैनात नहीं है। इसके कारण अब न तो ग्रामीणों को योग का प्रशिक्षण मिल रहा है और न ही योग सेंटर की देखभाल हो रही है।
गांव के प्रत्येक व्यक्ति को योग से जोड़ने के लिए पंचायत की जमीन पर योगशाला बनवाने का निर्णय लिया गया था। इसमें खेल विभाग की ओर से वर्ष 2018 में साक्षात्कार के आधार पर वालंटियर तैनात किए गए थे। इन्हें प्रत्येक महीने 25 हजार रुपये वेतन दिया जाता था। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि वेतन कम होने के कारण योग वालंटियर ने रुचि नहीं दिखाई। कई बार साक्षात्कार का आयोजन किया गया था लेकिन वालंटियर नहीं आए। इस कारण वालंटियर के पद खाली हैं।
पंचायत की जमीन पर बनाया गया था
योगशाला के लिए प्रत्येक गांव को करीब तीन एकड़ जमीन देनी थी। इस पर आयुष विभाग की ओर से निर्माण कराया गया। इसका रखरखाव करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सौंपी गई। आयुष विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि योगशाला का मामला अब ठंडे बस्ते में चला गया है। पिछले दो वर्षों से किसी भी योगशाला में वालंटियर नहीं है। इसके लिए उच्च अधिकारियों से भी कई बार संपर्क किया गया है लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है।
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अभी कुछ दिन पहले ही ज्वाइन किया हूं। इस संबंध में मुझे कुछ जानकारी नहीं है। कोच से बातचीत करने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। - जगवीर सिंह, जिला खेल अधिकारी
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योगशाला में वालंटियर तैयार करने के लिए उच्च अधिकारियों के पास प्रस्ताव भेजा गया है। दिशानिर्देश आने के बाद ही कुछ कहां जा सकता है। - डॉ. मोहित आयुष विभाग