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स्कूल सुरक्षा पर जबाव नहीं देने पर लगा 25 हजार रुपये का जुर्माना

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फरीदाबाद। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी न देने व आयोग के आदेशों की अनदेखी करने पर उपशिक्षा अधिकारी रहे डॉ. अब्दुल रहमान को भारी पड़ गया। सूचना आयोग ने डॉ. अब्दुल रहमान पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसका भुगतान 15 अक्तूबर तक करना होगा। उधर डॉ. अब्दुल का कहना है कि वह इस मामले के बारे में कुछ नहीं जानते थे। ऐसे में उन पर जुर्माना लगाया जाना गलत है। वह आयोग के सक्षम अपना पक्ष रखेंगे।
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आरटीआई के माध्यम से स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा नियमों की पालना संबंधी जानकारी जिला शिक्षा विभाग से मांगी गई थी। वर्ष 2017 से लंबित मामले में कई सुनवाई के बावजूद सूचना न मिलने के बाद आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बावजूद इसके मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कोई संतोषजनक सूचना नहीं मिली। नियमों की अनदेखी करने पर आयोग ने उपशिक्षा अधिकारी डॉ. अब्दुल रहमान पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्मानी ने फरीदाबाद उपायुक्त की कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए विभाग प्रतिनिधि की निंदा की। छात्रों की सुरक्षा संबंधी जानकारी समय पर न देने पर भी नाराजगी जताई। आरटीआई के माध्यम से पूछा गया था कि जिले के कौन से स्कूल ऐसे हैं जहां आग से बचाव की व्यवस्था है। ऐसे कितने स्कूल हैं जिनके पास संरचना स्थापना प्रमाण पत्र है।
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दरअसल, मामले की जानकारी जिला शिक्षा विभाग अधिकारी सतेंद्र कौर से मांगी गई थी लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह कुछ दिन अवकाश पर रहीं। उसी दौरान सूचना न देने के मामले में सुनवाई की गई। शिक्षा अधिकारी की गैरहाजिरी में मामले में जिम्मेदार अधिकारी के रुप में उपशिक्षा अधिकारी को जवाब देना था। लेकिन उस समय शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी ने मामले के प्रति गंभीरता नहीं जताई। ऐसे में सूचना आयुक्त ने 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए मामले को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।
उधर डा. अब्दुल रहमान का कहना है कि वह उपशिक्षा अधिकारी के कार्यभार से मुक्त कर दिए गए थे। मामला 21 अगस्त का है, जबकि वह अगस्त की पहली तारीख से मौलिक शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनके ऊपर जुर्माना लगना गलत है। उन्होंने बताया कि क्लर्क और अन्य लोगों की ओर से दी गई गलत जानकारी के कारण ऐसा हुआ है। वह आयोग के इस बारे में अपना पक्ष रखेंगे।
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