चालकों की कमी के कारण पटरी पर नहीं आ पा रही स्वास्थ्य विभाग की आपात सेवा
जच्चा-बच्चा से लेकर शव वाहन तक प्रभावित, जागरूकता की कमी और संसाधनों के कमजोर प्रबंधन से बढ़ रही परेशानी
नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत करीब 20 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन चालकों की कमी और संचालन संबंधी चुनौतियों के कारण इनका पूरा लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई गर्भवती महिलाओं को प्रसव या उपचार के लिए निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है, जबकि कई बार मृतकों के परिजनों को शव घर ले जाने के लिए भी निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है। हाल के महीनों में सामने आए कई मामलों ने जिले की आपात स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब 20 लाख की आबादी वाले जिले में एंबुलेंस सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन पर्याप्त चालकों के अभाव में सभी एंबुलेंसों का नियमित संचालन संभव नहीं हो पा रहा। इसका असर विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है।
चालकों की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार कई एंबुलेंस चालक न होने के कारण पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रही हैं। जरूरत के समय वाहन उपलब्ध कराने में भी कठिनाई आती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों ने स्वास्थ्य महानिदेशक से अतिरिक्त चालकों की मांग की है। उनका कहना है कि नियुक्तियां होने के बाद सेवाओं में सुधार आएगा और अधिक एंबुलेंस सड़कों पर उतर सकेंगी। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों और मानवबल के बीच असंतुलन व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
जच्चा-बच्चा को योजना का नहीं मिल रहा लाभ
सरकार गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद 45 दिन तक जच्चा-बच्चा को अस्पताल लाने और घर छोड़ने के लिए निशुल्क एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराती है। इसके बावजूद कई महिलाएं निजी वाहनों से अस्पताल पहुंच रही हैं। कई तीमारदारों का कहना है कि उन्हें इस सुविधा की जानकारी नहीं थी, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि आपात स्थिति में सरकारी वाहन का इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में लोग अतिरिक्त खर्च उठाकर निजी वाहन का उपयोग करना अधिक सुरक्षित समझते हैं।
जागरूकता की कमी भी जिम्मेदार
एंबुलेंस सेवाओं को लेकर जागरूकता का अभाव भी बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। अस्पताल आने वाले कई परिजनों ने बताया कि उन्हें गर्भवती महिलाओं के लिए उपलब्ध मुफ्त एंबुलेंस सुविधा की जानकारी नहीं थी। पिछले वर्ष स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी जिले में इन सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित प्रभाव नहीं दिख रहा है।
नागरिक अस्पताल में शव वाहन की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती। सूचना बोर्ड और जागरूकता अभियान प्रभावी न होने के कारण जरूरतमंद परिवार समय पर सरकारी सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के अनुरूप केवल एंबुलेंस की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। पर्याप्त चालक, मजबूत नियंत्रण व्यवस्था और व्यापक जनजागरूकता अभियान के बिना आपात स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाना संभव नहीं है।
जानकारी पहले मिलती तो सरकारी एंबुलेंस लेते, निजी वाहन पर खर्च नहीं करना पड़ता।-प्रदीप, तीमारदार
आपात स्थिति में इंतजार जोखिम भरा लगा, इसलिए तुरंत निजी वाहन का सहारा लिया।-विनोद, तीमारदार
गांवों में अभी भी एंबुलेंस सेवाओं की जानकारी सीमित है, जागरूकता बढ़नी चाहिए।-रेखा, तीमारदार
शव वाहन उपलब्ध है, सूचना बोर्ड की स्थिति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।-डाॅ. विकास गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
चालकों की नियुक्ति के बाद सभी एंबुलेंस का बेहतर उपयोग और संचालन संभव होगा।-डॉ. एमपी सिंह, नोडल अधिकारी, एंबुलेंस सेवा योजना