फरीदाबाद नगर निगम कार्यालय के बाहर परिवार के साथ धरने पर बैठा निकाला गया कर्मचारी देवेंद्र
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फरीदाबाद नगर निगम से 19 साल पहले निकाला गया एक कर्मचारी शुक्रवार को निगम मुख्यालय के बाहर परिवार सहित नौकरी की मांग के लिए धरने पर बैठ गया। चार बेटियों के इस परिवार की मांग है कि नगर निगम में छूटी हुई नौकरी नहीं मिली तो वह धरने की जगह आमरण अनशन करेंगे।
परिवार की चार नन्ही बेटियों सहित धरने पर बैठे देवेंद्र का कहना है कि वर्ष 2001 में उन्हें नगर निगम ने ज्यादा (सरप्लस) सफाई कर्मचारी होने की बात कह कर नौकरी से निकाल दिया था। ऐसे में उन्होंने दिहाड़ी मजदूरी शुरू कर दी।
देवेंद्र का कहना है कि उन्हें वर्ष 1997 में नौकरी पर रखा गया था। देवेंद्र का कहना है कि चार वर्ष बाद 2001 में नियमित होने के बावजूद नौकरी से बिना किसी नोटिस के उन्हें निकाल दिया गया। इसके विरोध में निकाले गए कई कर्मचारियों ने कानूनी कार्रवाई से असंतुष्टि जाहिर की। इसके बाद 2011 में कई कर्मचारियों ने आमरण अनशन किया।
इसके बाद करीब 900 कर्मचारियों को फिर से नौकरी पर रख लिया गया। देवेंद्र का आरोप है कि उसको नौकरी पर रखने के बजाय निगम ने अपना कर्मचारी होने से इंकार कर दिया। इस दौरान देवेंद्र दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट भरता रहा।
अब बीते कुछ वर्षों से पारिवारिक विवाद में सर की छत भी छिन गई। वहीं मजदूरी करने का सामर्थ्य भी खत्म हो गया। देवेंद्र का कहना है कि अब उसे नौकरी नहीं मिली तो परिवार का एक-एक सदस्य भूखा मरने की नौबत पर होगा। इसलिए वह अब परिवार सहित निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठा है।
परिवार में 11 वर्ष की बेटी कशिश का कहना है कि एक नौकरी मिलने से घर की सूरत बदल जाएगी। कशिश का कहना है कि परिवार की चार बेटियां पिता की बेरोजगारी में दम तोड़ देंगी। हमें इंसाफ दिया जाए।
देवेंद्र के दावों की जांच स्थापना शाखा से करवाई जाएगी। इसकी रिपोर्ट बनाकर निर्णय के लिए आला अधिकारियों को दी जाएगी।- डीआर भास्कर, मुख्य अभियंता, नगर निगम