नया फरीदाबाद (एनआईटी) शुक्रवार को 65 साल का हो जाएगा। 17 अक्तूबर 1949 को भगत सिंह चौक पर (एनएच-पांच) पहला फावड़ा चलाकर शहर को बसाने का काम शुरू किया गया था।
भारत-पाक विभाजन की त्रासदी झेलकर आए शरणार्थियों के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली के सटे फरीदाबाद में आंदोलन के बाद जमीन दी।
इसमें पेशावर, हजारा, मर्दाना, कोहाट, बन्नू एवं डेरा इस्माईल खान आदि फ्रंटियर इलाके से करीब 50 हजार शरणार्थियों ने आकर बसना शुरू किया।
गांधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और योजना आयोग के पूर्व सदस्य एलसी जैन ने नए फरीदाबाद शहर की कहानी बयां करने को एक पुस्तक लिखी।
फ्रंटियर से आए लोगों की जिजीविषा और उनके जज्बे के कारण उन्होंने इसे ‘द सिटी ऑफ होप’ का नाम दिया। इन शरणार्थियों को दिल्ली के आसपास क्षेत्र में छत के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।
सरकार इन्हें राजस्थान के अलवर और भरतपुर में बसाना चाहती थी। लेकिन उनका कहना था कि वहां उनका विकास नहीं हो सकता। लुट पिटकर आए लोगों को यहां नए सिरे से जिंदगी शुरू करनी थी।
शरणार्थियों ने सरकार के इस फैसले के विरोध में गिरफ्तारियां देनी शुरू कर दीं। नारे लगाए गए कि ‘नहीं जाणा सरकार अलवर नहीं जाणा’।
इस लड़ाई के बाद नेहरू सरकार ने फरीदाबाद न्यू टाउनशिप की योजना बनानी शुरू की। इस आंदोलन में शामिल रहे सरदार गुरबचन सिंह के मुताबिक यहां बसने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।
शरणार्थियों का नेतृत्व गोविंद दास खामोश सरहदी ने किया। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद फरीदाबाद विकास बोर्ड के चेयरमैन बने। बोर्ड के पहले मुख्य प्रशासक सुधीर बोस को बनाया गया। इसमें लेडी नाई, सालार सुखराम, सरदार गुरबचन सिंह आदि सदस्य बने।
इसके बाद शरणार्थियों के लिए मकान बनाने का काम शुरू हुआ। सरकार ने लोगों को मकान बनाने में सहयोग देने पर एक रुपया रोज मजदूरी देने का वादा किया।
233-233 गज के मकान बनाए गए। लोगों ने मिल-जुलकर यह काम शुरू कर दिया। शरणार्थियों को यहां बसाने में फ्रंटियर गांधी बादशाह खान ने भी अहम् भूमिका निभाई।
हालांकि, फ्रंटियर से आए लोगों की नई पीढ़ी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद और बादशाह खान जैसे अपने नायकों को भुला दिया। जिन लोगों के बसाने के बाद आज शरणार्थियों में से कई बड़े उद्योगपति हैं। पैसे वाले हैं वह भी अब तक अपने नायकों की मूर्ति तक नहीं लगवा सके हैं।
एलसी जैन की पुस्तक ‘द सिटी ऑफ होप’ के मुताबिक, ‘पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने सपनों का आधुनिक भारत बनाने के लिए फरीदाबाद बसाने की परियोजना को एक प्रयोगशाला के रूप में देखा। इसीलिए उन्होंने यहां औद्योगिक विकास की नींव रखी।’
नए फरीदाबाद का डिजाइन जर्मन आर्किटेक्ट निस्सन ने बनाया था। इसीलिए एक, दो, तीन, चार एवं पांच नंबर क्षेत्र को एनएच (निस्सन हट्स) के नाम से जाना जाता है।