नरेला इलाके में स्थित एक श्मशान घाट के पंडित ने अंतिम संस्कार के लिए लाए गए एक अधेड़ व्यक्ति की मौत के कारण पर संदेह होने पर पुलिस को बुला लिया। मृतक के गले पर निशान देखने के बाद उसने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। पुलिस ने शव को चिता से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
नरेला अनाज मंडी के पास स्थित श्मशान घाट में शनिवार सुबह कुछ लोग बिना अर्थी के सामान ढोने में इस्तेमाल होने वाली एक रिक्शा में एक व्यक्ति के शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर आए। शमशान घाट के पंडित पिंटू ने मृतक के बारे में जानकारी हासिल की तो उसका नाम हरिलाल निवासी कुरैनी मालूम हुआ। शव के साथ आए लोगों के संदिग्ध आचरण ने पिंटू का शक बढ़ा दिया।
उसे मृतक के गले पर निशान मिले तो साथ आए लोग संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और अंतिम संस्कार के लिए जल्दबाजी करने लगे। इस पर उसने पुलिस नियंत्रण कक्ष को मामले की सूचना दी। इसी बीच कुरैनी गांव के कुछ लोग भी सामाजिक कार्यकर्ता शमीम चौधरी के साथ शमशान घाट पहुंचे और पुलिस के आने तक अंतिम संस्कार को रोके रखा।
शमीम चौधरी का कहना है कि जिस बिल्डिंग में हरिलाल की दुकान थी उसका मालिक भी बिना कानूनी औपचारिकताओं के शव का अंतिम संस्कार करवाना चाहता था। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने हरिलाल के शव को कब्जे में लेकर नरेला स्थित राजा हरीश्चंद्र अस्पताल में भिजवाया। वहां से शव को पोस्टमार्टम के लिए बाबू जगजीवन राम अस्पताल भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार मामले की जांच की जा रही है। मौत का कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घरेलू झगड़े में गंवाई जान
हरिलाल की मौत और आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार करवाने के मामला संदेह के घेरे में है। बताया गया है कि मूलरूप से दरभंगा, बिहार का रहने वाला हरिलाल यहां कुरैनी में परिवार सहित किराए के मकान में रह रहा था। वह एक किराना की दुकान चलाता और वहीं पर सोता भी था। बताया जाता है कि शुक्रवार रात उसका घर पर झगड़ा हुआ था।
रात में वह दुकान में आकर सो गया सुबह उसे किसी ने फंदे पर लटका देखा तो परिवार वालों को फोन किया। परिवार वाले मकान मालिक की सहायता से आनन-फानन में शव को फंदे से उतारकर बिना पुलिस को सूचित किए दाह-संस्कार के लिए शमशान घाट लेकर आए थे।