निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन ने बकाया राशि का भुगतान न होने पर शव देने से मना कर दिया।
इतना ही नहीं उन्होंने डाक्टरों पर लापरवाही का भी आरोप लगाया। उधर, शव का पोस्टमार्टम व कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित प्रमाण लेने के बाद अस्पताल ने चार घंटे बाद शव सौंप दिया। बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया से इलाज कराने पहुंचे मरीज के परिजनों ने पुलिस में कोई शिकायत नहीं दी है।
मृतका विजय यादव (45) की बहन गुड़िया ने बताया कि उनके भाई की मौत रविवार सुबह करीब सबा नौ बजे हो गई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने शुरुआत में शव देने से यह कहते हुए इनकार किया कि पहले इलाज की बकाया राशि चुकाएं।
परिजनों का कहना था कि अभी तक पांच लाख रुपये अस्पताल को दे चुके हैं और मौत के बाद और सात लाख रुपये की और मांग की जा रही है। परिजनों का यह भी आरोप था कि डॉक्टर की लापरवाही से मरीज की मौत हुई है।
मरीज को 15 दिसंबर को दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके हृदय में वॉल्व लगाया गया। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। उधर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज वेंटिलेटर पर था और तबीयत बिगड़ने पर रविवार को उसकी मौत हो गई। मौत के बाद कुछ कागजी और प्रशासनिक कार्रवाई की वजह से देरी हुई थी।
मरीज के परिजनों ने अस्पताल को यह लिखकर दिया है कि वे न तो शव का पोस्टमार्टम कराना चाहते हैं तो और न ही इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। पीड़ित परिजनों की ओर से इलाज की बकाया राशि भी नहीं चुकाई गई।उधर, परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम न करवाने व कोई भी कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित प्रमाण लेने के बाद शव सौंपा है।