पुलिस की गिरफ्त में आरोपी महिला
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एम्स में इलाज के लिए आए भोले-भाले मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे रुपये ऐंठने वाली एक फर्जी महिला डॉक्टर को पुलिस ने एम्स अस्पताल से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहल्ला नंबर-5, बिल्सी, बदायूं, यूपी निवासी शुभी त्रिवेदी के रूप में हुई है। आरोपी खुद को एम्स का जूनियर डॉक्टर बताकर ठगी करती थी। डॉक्टरों का कोट पहनकर वह मरीजों के परिजनों से जल्दी इलाज कराने का झांसा देकर वारदात को अंजाम दे रही थी। उत्तराखंड के हरिद्वार से आए एक व्यक्ति की बेटी का इलाज कराने के नाम पर आरोपी ने 96 हजार रुपये ले भी लिए थे। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने महिला को एम्स ओपीडी के पास से गिरफ्तार कर लिया।
दक्षिण जिला की पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने बताया कि 18 अप्रैल को हौजखास थाने में ठगी की एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह परिवार के साथ उत्तराखंड के हरिद्वार में रहता है। उसे अपनी बेटी को एम्स में दिखाना था। 21 मार्च को वह एम्स में पहुंचा तो वहां उसे नकली डॉक्टर मिली। आरोपी युवती ने खुद को एम्स का जूनियर डॉक्टर बताया। डॉक्टर ने एम्स का डॉक्टरों वाला कोट पहनने के अलावा अपने नाम की नेम प्लेट भी लगा रखी थी।
पीड़ित को जल्दी इलाज कराने का भरोसा देकर आरोपी ने अपने खाते में ऑन लाइन 96 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद गायब हो गई। यहां तक कि उसने उसका फोन भी उठाना बंद कर दिया। ठगी का अहसास होने पर उसने मामले की सूचना एम्स पुलिस चौकी में दी। मामला दर्ज कर जांच शुरू करते हुए थाना प्रभारी शिव दर्शन शर्मा व एम्स चौकी इंचार्ज दीपेंद्र व अन्यों की टीम का गठन किया। सीसीटीवी, टेक्निकल सर्विलांस और बैंक खातों की डिटेल जुटाने के बाद पुलिस ने आरोपी की फोटो प्राप्त कर ली। इसके बाद पूरे अस्पताल के गार्ड्स को फोटो दिखाई गई। छानबीन के बाद पुलिस की टीम को कामयाबी मिली। खबर मिली कि आरोपी ओपीडी के पास मौजूद है। पुलिस ने उसे दबोच लिया।
फॉरेंसिक साइंस से एमएससी पास है आरोपी
आरोपी शुभी त्रिवेदी ने बताया कि उसका परिवार बदायुं के बिल्सी में रहता है। उसने बरेली के एक कॉलेज से माइक्रोबायोलॉजी में बीएससी की थी। बाद में उसने फॉरेंसिक साइंस से एमएससी की। उसे फॉरेंसिक की ठीक-ठाक जानकारी है। उसने इसका फायदा उठाया। उसने ठगी के लिए बाजार से एक सफेद रंग का डॉक्टरों वाला कोट खरीदा। इसके बाद उसने खुद के नाम की नेमप्लेट भी बनवा ली। वह खुद को फॉरेंसिक्स एंड टॉक्सिकोलॉजी का डॉक्टर बताकर एम्स में तैनाती बताती थी। वह लोगों को एम्स में जल्द से जल्द इलाज का झांसा देकर ठगी कर रही थी।