विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन शैली में आए बदलाव के कारण दिल्ली सहित देश में एनएएफएलडी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण लिवर से जुड़ीं समस्याएं हो सकती हैं। आईएलबीएस के महामारी विज्ञान विभाग में विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. भारत भूषण रेवारी ने बताया कि संस्थान ने मोहल्ला क्लीनिकों में आए मरीजों पर एक अध्ययन किया है।
अध्ययन की रिपोर्ट को विश्व लिवर दिवस के अवसर पर संस्थान के प्रमुख डॉ. एस के सरीन प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अभी तक शराब पीने वालों में दिक्कत ज्यादा दिखती थी, लेकिन अब मोटापा, मधुमेह, काम करने की शैली में बदलाव व दूसरे कारणों से लिवर पर असर पड़ा है। यहीं कारण है कि देश में एनएएफएलडी का आंकड़ा 30 फीसदी तक है।
खान-पान में सुधार कर दूर कर सकते हैं समस्या
दिल्ली नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (आयुर्वेद) डॉक्टर आरपी पाराशर ने कहा कि आहार विहार में सुधार कर फैटी लिवर की समस्या से बच सकते हैं। ऐसे मरीजों में सिरोसिस व अन्य गंभीर लिवर रोग होने का खतरा रहता है। शरीर में वसा के अधिक जमाव और इंसुलिन प्रतिरोध के परिणामस्वरूप लिवर में फैटी एसिड की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। फैटी लिवर की स्थिति में भी मरीज यदि कार्बोहाइड्रेट और संतृप्त वसा से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन जारी रखें तो रोग की गंभीरता बढ़ती चली जाती है।