औद्योगिक नगरी का तमगा खोने के बाद अब गाजियाबाद के एजुकेशन हब पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सत्र 2014-15 की काउंसलिंग और सीधे एडमिशन के बावजूद इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों में सीटें नहीं भर सकी।
विवि की रैंकिंग में शुमार कॉलेजों को भी सीटें भरने के लिए कई पापड़ बेलने पड़े। विद्यार्थियों के होते मोहभंग से परेशान इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन ने स्कूलों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
गाजियाबाद में एचआरआईटी के बाद अब हाईटेक इंस्टीट्यूट और सुंदरदीप इंस्टीट्यूट ने भी अपनी नई स्कूलों की शाखाओं की शुरुआत की है।
फैक्ट्रियां बंद कर खुले संस्थानों की हालत भी पतली
कभी उद्योग नगरी के नाम से मशहूर गाजियाबाद में व्यापार की स्थिति खराब हुई तो लोगों ने अपनी फैक्ट्रियों को बंद कर इंजीनियरिंग और प्रबंधन कॉलेज खोले।
एक के बाद एक खुले इन कॉलेजों के चलते गाजियाबाद को एजुकेशन हब के नाम से पहचाना जाने लगा था, मगर अब यूपीटीयू की नीतियों, जागरूकता, इंजीनियरिंग सेक्टर में नौकरियों का अभाव सहित दूसरे प्रदेशों में करियर की अपार संभावनाओं को देखकर अधिकांश विद्यार्थी दूसरे प्रदेशों की ओर रुख करने लगे हैं।
गाजियाबाद के टॉप कॉलेजों को छोड़कर बाकी में काबिल फैकल्टी, सुविधाएं, एक्सपोजर और प्लेसमेंट का अभाव भी इसकी एक वजह है।
काउंसलिंग में कई कॉलेजों में 20 सीटें भी नहीं भरीं
यूपीटीयू की काउंसलिंग ने इस बार इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों को आयना दिखा दिया। टॉप कॉलेजों को छोड़कर अधिकांश में बामुश्किल काउंसलिंग में 20 सीटें भर सकीं। काउंसलिंग के बाद कई विद्यार्थियों के रिपोर्टिंग नहीं करने से स्थिति और भी खराब हो गई। नामी कॉलेजों को सीटें भरने के लिए अपने मानकों में परिवर्तन तक करने पड़े। फिर भी अंत तक कुछ सीटें खाली रह गईं।
स्कूल संचालन में सिरदर्दी कम, मुनाफा ज्यादा
दिल्ली एनसीआर में गाजियाबाद के स्कूलों ने अपनी छाप छोड़ी है। गाजियाबाद में अकेले डीपीएसजी की 8 शाखाएं हैं। साथ ही नेहरू वर्ल्ड, गुरुकुल, रायन इंटरनेशनल, डीएलएफ, एमिटी, छबीलदास, केडीबी सहित तमाम स्कूल अच्छी शिक्षा के मामले में कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं।
स्कूलों में कम जोखिम, कम सिरदर्दी और अधिक लाभ के कारण भी इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा है।