60 मीटर एरिया में एक्सप्रेसवे बना है। बाकी 40 मीटर में से 20 मीटर में ग्रीनरी, पौधों की सिंचाई की पाइपलाइन आदि सुविधाएं विकसित की गई हैं। बाकी 20 मीटर की चौड़ाई में कॉरिडोर मेट्रो के लिए काफी है। एलिवेटेड मेट्रो होगी, इसलिए उसे ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कुंडली स्थित आर्ट गैलरी में इसे दर्शाया गया है। अधिकारी ने बताया कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का मेन कैरिज तो बन गया है, लेकिन अभी बहुत सी सुविधाएं देना बाकी हैं। पेट्रोल पंप, खानपान, सीसीटीवी कैमरे, टोल बूथ तैयार करने आदि में छह माह लग जाएंगे। इसके बाद अगला फोकस मेट्रो पर ही होगा।
एनएचएआई के अधिकारी ने बताया कि जिस तरह एक्सप्रेसवे के जरिये ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल का रिंग बन रहा है। उसी तरह मेट्रो के जरिये भी रिंग बनेगा, जिससे इन दोनों ही एक्सप्रेसवे के बराबर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित हो सकें।
eastern peripheral expressway
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यह कॉरिडोर दिल्ली एनसीआर में मौजूदा इंडस्ट्रियल एरिया से क्षेत्रफल में कम नहीं होगा। हालांकि, प्रधानमंत्री ने फिलहाल ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के बराबर मेट्रो चलाने की बात कही थी, लेकिन भविष्य में दोनों को जोड़ा जा सकता है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के बराबर मेट्रो से सबसे ज्यादा फायदा ग्रेटर नोएडा व यीडा को मिलेगा। दरअसल, दिल्ली से मुंबई के बीच वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर दादरी से होकर गुजर रहा है। इससे औद्योगिक गतिविधि तेजी से बढ़ेगी। आसपास तमाम इंडस्ट्री बसेंगी।
मेट्रो चलने से औद्योगिक विस्तार को अधिक बल मिलेगा। सबसे ज्यादा एरिया करीब 41 किलोमींटर गौतमबुद्ध नगर में आता है, जबकि गाजियाबाद में 24, बागपत में 20, सोनीपत में 13, पलवल में 23 और फरीदाबाद में 14 किलोमीटर का एरिया है।