डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा डालकर वापस आती कूड़ा गाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
इस बाबत जब एसीईओ राकेश कुमार मिश्र से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी एनजीटी का ऑर्डर नहीं पढ़ा है। ऑर्डर आने के बाद ही तय होगा कि कहां कूड़ा डाला जाएगा। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर सेक्टर-123 में कूड़ा डालने की बात नहीं कही, लेकिन आखिरी तौर पर सेक्टर-123 ही एकमात्र विकल्प होने की बात से इनकार भी नहीं किया।
आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी : सुखवीर
डंपिंग ग्राउंड संघर्ष समिति के मुखिया सुखवीर पहलवान ने कहा कि किसी भी कीमत पर सेक्टर-123 को डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने दिया जाएगा। यहां कूड़ा घर बनने से आसपास के 20 गांव, सेक्टर-122, 121 और 119 समेत कई सोसायटी व ग्रेनो वेस्ट के लिए नरक हो जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरण ने एनजीटी में झूठ बोला कि उनका प्रोजेक्ट सेक्टर-123 में है। यह नहीं बताया कि यह स्थान हिंडन नदी से एकदम सटा है। साथ ही एफएनजी के किनारे है। यहां आसपास लाखों लोग रह रहे हैं। अगर प्राधिकरण ने यहां कूड़ा डाला तो इस बार आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा डालकर वापस आती कूड़ा गाड़ी
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वीडियोग्राफी कराई गई : रघुराज
किसान नेता रघुराज सिंह ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से सेक्टर-54 में डंपिंग ग्राउंड का लोगों ने डटकर विरोध किया और एनजीटी ने रोक लगा दी। बुधवार को भी प्राधिकरण ने वहां कूड़ा डाला, यह तो एनजीटी के आदेश का उल्लंघन है। इसकी वीडियोग्राफी कराई गई है और इसे कोर्ट में दिया जाएगा। कोर्ट ने वहां से कूड़ा हटाने को कहा है, न कि डालने।
सेक्टरों में कूड़ा निस्तारण से खत्म हो सकती है समस्या : एसीईओ
एसीईओ राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि नोएडा प्राधिकरण ने एक बहुत ही अच्छी योजना आरडब्ल्यूए को सुझाई है, जिसमें कंपोस्टर मशीन लेकर कूड़े का निस्तारण किया जा सकता है। इसके बाद कंपोस्ट खाद का उपयोग दूसरे कामों में किया जा सकता है।
इससे कूड़े को डंप करने की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है, लेकिन अभी भी केवल पांच से छह आरडब्ल्यूए ही इस योजना को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी ले रहे हैं। अगर सभी आरडब्ल्यूए इसे अपना लें तो इससे शहर को भी फायदा होगा।