फरीदाबाद में बिजली की बढ़ती खपत आने वाले समय के लिए खतरे के संकेत दे रही है। अप्रैल में ही जून जैसी गर्मी ने बिजली की खपत को अचानक बढ़ा दिया है। इसका असर शहर के जर्जर बिजली तंत्र पर दिखने लगा है।
रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्र में कटौती का सिलसिल शुरू हो गया है। कहीं घंटेभर का कट लगाया जा रहा है तो कहीं तीन से चार घंटे की कटौती हो रही है। हालांकि, राज्य में फिलहाल बिजली की कमी नहीं है लेकिन खपत का ग्राफ ऐसे ही ऊपर चढ़ता रहा है तो वो दिन दूर नहीं जब रोशनी करने के लिए मोमबत्ती का सहारा लेना होगा।
एक महीने पहले 19 मार्च को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 5186 मेगावाट दर्ज की गई थी, जबकि महीनेभर बाद 19 अप्रैल को यह आंकड़ा 7005 मेगावाट पर पहुंच गया है।
हालांकि, राज्य में बिजली की फिलहाल पर्याप्त उपलब्धता है लेकिन अप्रैल के महीने में रिकॉर्ड तोड़ बिजली की मांग ने निगम के अधिकारियों की चिंता बढ़ाकर रख दी है। अगर बात करें फरीदाबाद सर्कल की तो एक सप्ताह में ही यहां बिजली की खपत करीब पांच लाख यूनिट तक बढ़ गई है। बिजली सबस्टेशनों पर लोड बढने से इनका दम निकलने लगा है। ओवरलोडिंग के चलते शहर में कटौती का सिलसिला शुरू हो गया है। शहर के औद्योगिक फीडरों पर सबसे ज्यादा कटौती हो रही है।
इरकॉन, जाजरू, ग्लोब स्टील, ओसवाल और सूरजकुंड फीडर सबस्टेशन की सप्लाई बाधित होने से इनसे जुड़ा शहर का बड़ा हिस्सा बिजली कटौती का शिकार हुआ। डबुआ, जवाहर कॉलोनी, नवादा, पवर्तीय कॉलोनी, संजय कॉलोनी, एनएच-पांच, एनएच-दो, बसेलवा कॉलोनी, गौच्छी, राजीव कॉलोनी, सेक्टर 55 सहित कई जगह बिजली की आंख मिचौली का सिलसिला चलता रहा। अप्रैल में ही बिजली की मांग रिकॉर्ड तोडने लगी है तो आने वाले दिनों में क्या होगा। इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है।
बिजली की मांग ने तोड़ा रिकॉर्ड
अप्रैल के महीने में बिजली की अधिकतम मांग ने इस बार पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। साल 2012 में जहां पूरे राज्य की मांग 3473 मेगावाट दर्ज की गई थी। वही अप्रैल 2016 में 7005 मेगावाट तक पहुंच गई है।
जहां ज्यादा बिल, वहां ज्यादा बिजली
34000 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही राज्य की बिजली वितरण कंपनियों की हालत पतली हो रही है। घाटे की पूर्ति के लिए सरकार सब डिवीजनों को निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है और कर्मचारी यूनियन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खुद मानते हैं कि जर्जर बिजली तंत्र से लाइनलॉस बढ़ रहा है। रविवार को तिगांव रैली को संबोधित करते हुए सीएम ने स्पष्ट कह दिया कि जहां ज्यादा बिल मिलेगा, वहां बिजली ज्यादा दी जाएगी।
साल दर साल ऐसे बढ़ रहा ग्राफ
साल अधिकतम मांग
2012 3473 मेगावाट
2013 4853 मेगावाट
2014 5346 मेगावाट
2015 5383 मेगावाट
2016 7005 मेगावाट
(नोट: आंकड़े राज्य के अप्रैल माह पर आधारित हैं।)
फरीदाबाद में ऐसे बढ़ी मांग
12 अप्रैल 123.45 लाख यूनिट
13 अप्रैल 121.79 लाख यूनिट
14 अप्रैल 130.64 लाख यूनिट
15 अप्रैल 132.20 लाख यूनिट
16 अप्रैल 136.03 लाख यूनिट
17 अप्रैल 121.91 लाख यूनिट
18 अप्रैल 128.34 लाख यूनिट
कुछ इलाकों में बिजली कटौती हो रही है, लेकिन जिस तरह पारा चढ़ रहा है और मांग बढ़ रही है। उसको देखते हुए आने वाले दिनों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।-रमणीक प्रभाकर, महासचिव-मैनुफेक्चर्स एसोसिएशन फरीदाबाद
पिछले दिनों के मुकाबले बिजली कटौती शुरू हो गई है। कटौती का कोई शेड्यूल नहीं बताया जाता। कहीं मरम्मत या कोई और काम करने से पहले लोगों को सूचना नहीं दी जा रही है।-एनके गर्ग, अध्यक्ष-कंफेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए फरीदाबाद
-बिजली की मांग जरूर बढ़ रही है लेकिन फिलहाल हालात सामान्य हैं। कहीं जरूरत पडने पर ही बिजली कटौती की जा रही है। गर्मियों में कम से कम कटौती हो, इसकी कोशिश की जाएगी।-मुकेश गुप्ता, अधीक्षण अभियंता-डीएचबीवीएन फरीदाबाद सर्कल