चुनाव कार्यालय के अनुसार, अब जनसभा, रैली, बैठक, जनसंपर्क आदि पर प्रतिबंध लग चुका है। सोशल मीडिया से लेकर बैठकों आदि की निगरानी भी शुरू हो चुकी है। कोई भी प्रत्याशी या कोई भी दल अब वोट मांगने की अपील नहीं करेगा।
यह है स्थिति
कुल मतदाता : 1,47,86,382
पुरुष : 81,05,236
महिला : 66,80,277
थर्ड जेंडर : 869
कुल मतदान बूथ : 13,750
संवेदनशील व अतिसंवेदनशील बूथ : 3841
मतगणना केंद्र : 27
सुरक्षा इंतजाम
दिल्ली पुलिस : 38,874
होमगार्ड : 19 हजार
अन्य कर्मचारी : एक लाख से अधिक
प्रचार थमने के बाद पार्टी कार्यालयों पर देर रात तक चली मंत्रणा
रात के लगभग 10 बज रहे थे। राजनीतिक पार्टियों के चुनाव कार्यालय में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आवागमन शुरू हो गया। पंत मार्ग, गांधी नगर, राजीव भवन, डीडीयू मार्ग, पालम समेत कई राजनीतिक पार्टी के चुनाव कार्यालय पर कार्यकर्ता कुर्सी पर बैठे थके नजर आए। पता चला कि 16 दिन पदयात्रा, रैली, जनसभा, रोड शो कर कार्यकर्ता थकान मिटा रहे थे। चुनाव प्रचार थमने के बाद देर रात तक कुछ इस तरह का नजारा पार्टी दफ्तरों में नजर आया।
पंडित पंत मार्ग स्थित भाजपा के चुनाव कार्यालय में कार्यकर्ता गहन मंथन में जुटे थे। यही हाल आम आदमी पार्टी के कार्यालय व प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में भी देखने को मिला। यहां पार्टी कार्यकर्ता चुनाव प्रचार थमने के बाद कैसे बूथ प्रबंधन करें व बृहस्पतिवार को डोर-टू-डोर कैंपन करें, इसकी मंत्रणा चल रही थी। संगठन के कार्यकर्ता अपनी तैयारी में जुटे थे तो राजनीतिक कार्यकर्ता अपनी चुनावी रणनीति तैयार कर रहे थे।
करावल नगर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद सिंह के तुकमीरपुर स्थित कार्यालय में प्रचार से लौटे कार्यकर्ता मंत्रणा करते हुए दिखें। सभी अपने-अपने तर्क रख पार्टी को जिता रहे थे। रोहताश नगर विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी विपिन शर्मा के नवीन शाहदरा स्थित कार्यालय के बाहर कार्यकर्ता प्रचार करके आते दिखाई दिए।
कृष्णानगर के भाजपा प्रत्याशी डॉ. अनिल गोयल के कार्यालय में कार्यकर्ताओं का आवागमन जारी था। तीमारपुर विधानसभा के प्रत्याशी दिलीप पांडेय के चुनाव कार्यालय में भी कार्यकर्ता बृहस्पतिवार को डोर-टू-डोर कैंपेन की तैयारी करते दिखें। कार्यकर्ताओं में इस बात की चर्चा थी कि बस एक दिन की बात है, पूरी ताकत के साथ हर घर तक वोटर स्लीप पहुंचानी है। हर किसी ने अपने-अपने उम्मीदवार को जिताने का दावा किया।
ऐसा होगा आदर्श मतदान केंद्र
मतदान केंद्रों पर लोगों को आकर्षित करने के लिए 70 मॉडल मतदान केंद्र (प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक) स्थापित किए जा रहे हैं। यहां पर मेडिकल किट, क्रेच, रैंप, व्हीलचेयर आदि उपलब्ध रहेगा। प्रत्येक बूथ को सुसज्जित कर उन्हें हर लिहाज से आकर्षक बनाया जाएगा। यहां महिला स्टाफ की तैनाती होगी। इसे पिंक बूथ भी कहा जाएगा।
बुजुर्गों के लिए खास व्यवस्था
बुजुर्गों को लाने ले जाने की सुविधा प्रदान की जाएगी। एक मतदान अधिकारी को विशेष रूप से 100 वर्ष से अधिक के मतदाता के लिए नामित किया जाएगा। उस अधिकारी की जिम्मेदारी ऐसे मतदाताओं के घर से लाकर उन्हें मतदान के बाद सुरक्षित घर तक पहुंचाने की होगी। 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के दिल्ली में 204830 मतदाता हैं, इनमें से जिनकी उम्र 100 या उससे अधिक है उनकी संख्या 147 है।
हर जिले में दिव्यांगों के लिए होगा एक बूथ
दिव्यांग मतदाताओं के लिए हर जिले में एक बूथ तैयार किया जा रहा है। 11 बूथ ऐसे होंगे जहां सभी कर्मचारी से लेकर सुरक्षा जवान तक दिव्यांग होंगे। यहां दिव्यांग मतदाताओं के लिए अलग से इंतजाम किए गए हैं। इन 11 बूथ पर मतदाताओं को अद्भुत तकनीक का अनुभव होगा।
यहां क्यू आर कोड से मतदान हो सकेगा। फोटो वोटर पर्ची पर ये क्यूआर कोड अंकित होगा। दिल्ली में दिव्यांग मतदाता 50473 हैं, जबकि 4763 दृष्टिहीन मतदाता हैं। इनके लिए ब्रेल एपिक जारी किए हैं। दिव्यांग मतदाताओं के लिए 85 साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर होंगे।
फैक्ट्स
- सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा सीट : मटियाला (4,23,682 मतदाता)
- सबसे कम मतदाताओं वाली सीट : चांदनी चौक (1,25,684 मतदाता)
- लोकसभा चुनाव के बाद बढ़े मतदाता : चार लाख 69 हजार 929
- 18 से 19 वर्ष के बीच फर्स्ट टाइम वोटर : 2,32,815
- सेवा मतदाता : 11,608