अंगदान की भारी कमी के बीच सोमवार को दिल्ली की एक आठ साल की ब्रेन डेड मासूम का दिल धड़कने को बेताब है, लेकिन 6 घंटे तक इसके दिल को कोई शरीर नहीं मिला। स्थिति यह रही कि परिवार बच्ची को किसी और के रूप में जीवित देखने की इच्छा रखता है।
दिल्ली के सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक में शरीर नहीं मिलने से देर रात तक निराशा ही हाथ लगी। इस बीच सरकारी सिस्टम की बड़ी खामियां भी सामने आईं, जिस संदेश को सभी अस्पतालों में भेजा गया, उसमें लिखा फोन नंबर लगातार बंद था।
यही नहीं, दो घंटे तक अस्पतालों को ये भी नहीं पता था कि बच्ची का ब्लड ग्रुप क्या है? उसकी ऊंचाई कितनी हैं? रात 11 बजे तक बच्ची के परिजनों के अनुसार किसी भी अस्पताल से जबाव नहीं मिला है।
दिल्ली के नजफगढ़ इलाका निवासी प्रवीण धनखड़ की बेटी 8 वर्षीय मासूम माही सेरेबल एडिमा से पीड़ित है। वह द्वारका सेक्टर 3 स्थित आकाश अस्पताल में उपचाराधीन थी, लेकिन सोमवार को ब्रेन डेड होने के कारण बच्ची के जीवन से जुड़ी परिवार की आश टूट गई।
माता पिता ने बच्ची के अंगदान करने का फैसला डॉक्टरों को सुनाया तो दोपहर 2 बजे डॉक्टरों ने परिवार की काउंसलिंग की। इसके बाद शाम 5 बजे अस्पताल से राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) की हेल्पलाइन पर नंबर पहुंचा।
नोटो की ओर से सभी अस्पतालों को लेकर बनाए गए वॉट्सएप ग्रुप पर ये मैसेज डाला गया। इसके बाद गुडग़ांव के मेदांता, दिल्ली के अपोलो, बीएलके, फोर्टिस और एम्स तक से डिकलाइन (इंकार) आया। इसके बाद शाम 7 बजे तक ग्रुप पर नोटो की ओर से बच्ची के ब्लड ग्रुप इत्यादि से जुड़ी कोई जानकारी साझा नहीं की गई थी।
मैसेज में जिस व्यक्ति का फोन नंबर दिया था, वह लगातार बंद आ रहा था। शाम 7 बजे के आसपास नोटो ने माही की उम्र, ऊंचाई और ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप होने की जानकारी दी। हालांकि देर रात तक नोटो की ओर से किसी भी अस्पताल से दिल लेने का मैसेज नहीं मिला।