फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दंगों के घाव के बाद उम्मीद बनकर आई ईद, घर लौटे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग

Thu, 07 Jul 2016 09:47 AM IST
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन
अटाली की फिजा को खुशगवार बनाने के लिए ईद से बढ़िया अवसर शायद फिर कभी न मिले। यही सोचकर गांव के अमन पसंद लोगों ने पुरानी बातों को भूलने व नए सिरे से गांव की तरक्की में हाथ बंटाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन


उम्मीद है कि ईद के मौके पर दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे के करीब आएंगे। त्योहार को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने तैयारी शुरू कर दी है।

बुधवार सुबह तकरीबन सभी परिवार गांव लौटे और उन्होंने अपने-अपने घरों में साफ-सफाई कर ईद मनाने की तैयारी की।

जख्म भरने का नाम नहीं ले रहे हैं

- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, तमाम सुलह और कोशिशों के बावजूद अटाली में बीते साल के जख्म भरने का नाम नहीं ले रहे हैं। 25 मई, 2015  की घटना में सदियों पुराना आपसी भाईचारा भी भेंट चढ़ गया।

धार्मिक स्थल के विवाद ने दो समुदाय को आमने-सामने ला खड़ा कर दिया था। विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, तो गांव के आधे से ज्यादा अल्पसंख्यक परिवार पलायन कर अपने नए ठिकानों पर गुजर-बसर करने को मजबूर हो गए।

सांप्रदायिक तनाव की गर्मी के बीच ईद के मौके पर अल्पसंख्यक समुदाय ने भरपूर तैयारी की है। शाबिर अली का कहना है कि उनके घर पर इस बार सेवईयां, शीर और खीर, दही-भल्ले, चाट-पकौड़ी और फल द्वारा ईद का त्योहार मनाया जाएगा। उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को ईद के मौके पर अपने यहां आने का न्योता दिया है। हर ग्रामीण का स्वागत खीर खिलाकर किया जाएगा।
विज्ञापन

कुछ परिवारों में अब भी मायूसी

ईद मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसका इंतजार लोग पूरे साल करते हैं, लेकिन इस बार गांव के कुछ परिवारों में यह खुशी फीकी पड़ गई। गांव की रुखसाना बताती हैं कि जब घर-द्वार नहीं रहा, जिसे परिवार के लोगों ने बनाया था, तो अब किसके यहां और किसके साथ ईद की खुशियां बांटें।
  बुजुर्ग महिला विलकिसा बेगम की आंखें बात करते-करते नम हो जाती हैं और वे कहती हैं कि मेरा गांव बहुत अच्छा है और पहले उसमें अच्छे लोग भी रहते थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अटाली के लोग हम लोगों के साथ ऐसा बर्ताव करेंगे। कौन लोग थे, ये कहां से आए थे, पता नहीं पर यकीन नहीं होता कि यह सब अटाली के लोगों ने किया है।

मैं हर बार ईद के मौके पर अल्पसंख्यक परिवारों में जाता हूं। इस बार मेरा प्रयास है कि पूरी पंचायत मुस्लिमों को बधाई देने के लिए जाए, ताकि गांव में एक साल से जारी तनाव खत्म हो सके।
-प्रह्लाद सिंह, सरपंच अटाली

इस बार ईद के मौके पर अटाली में पुलिस बल नहीं बढ़ाया गया है। गांव में पूरी तरह शांति है। किसी तरह की दिक्कत अब नहीं है। हालांकि गांव में पहले से ही 150 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं।
-मोहिंद्र सिंह, एसएचओ, थाना छांयसा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें